नेपाल और लखनऊ में तलाश के बाद पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर किया सरेंडर, 76 फर्जी कंपनियों का खुला जाल
Kanpur । 5600 करोड़ रुपये के संदिग्ध साइबर ठगी नेटवर्क की जांच में बुधवार को बड़ा मोड़ आ गया। लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर चल रहा रिटायर्ड दारोगा का बेटा इखलाक हुसैन अचानक पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया। उसके सरेंडर करते ही पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। अब जांच एजेंसियों की नजर उसके बैंक खातों और नेटवर्क से जुड़े लोगों पर है।
करोड़ों के लेनदेन ने बढ़ाया शक
पुलिस की जांच में इखलाक के कई बैंक खातों से करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन सामने आए हैं। जांच अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि इन खातों में रकम कहां से आई और किन-किन खातों तक पहुंचाई गई। ठगी की रकम को अलग-अलग माध्यमों से खपाने की आशंका को लेकर भी पूछताछ की जा रही है।
फर्जी कंपनियों के सहारे बिछाया जाल
जांच में अब तक फर्जी दस्तावेजों पर तैयार 76 कंपनियों और फर्मों का पता चला है। आरोपित फर्जी फर्मों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर रकम मंगाते थे। इसके बाद ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और फर्जी निवेश के नाम पर जुटाई गई रकम को दर्जनों खातों में ट्रांसफर किया जाता था।
नेपाल से लखनऊ तक तलाश
इखलाक लंबे समय से फरार था। पुलिस को उसकी लोकेशन नेपाल और लखनऊ में भी मिली थी। अब उसके सरेंडर के बाद साइबर सेल और पुलिस टीम नेटवर्क की परतें खोलने में जुट गई है। मामले में शाहजेब वारिस और सलमान पहले ही गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं। जांच में अब तक 14 मुख्य आरोपितों के नाम सामने आए हैं। पुलिस को उम्मीद है कि इखलाक से पूछताछ में नेटवर्क से जुड़े कई और राज खुल सकते हैं।


