छात्रों का भविष्य सर्वोपरि बताते हुए प्रधानमंत्री को भेजा त्यागपत्र, कहा- जिम्मेदारी से कभी पीछे नहीं हटा
New delhi । नीट-यूजी परीक्षा विवाद और देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे त्यागपत्र में कहा कि यह फैसला किसी व्यक्तिगत कारण से नहीं, बल्कि छात्रों के हित, शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और देश की एकता को ध्यान में रखकर लिया गया है।
‘पहले दिन से जिम्मेदारी स्वीकार की’
धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपना इस्तीफा सार्वजनिक करते हुए लिखा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं ने उन्हें बेहद दुखी किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही पूरे मामले की जिम्मेदारी ली और कभी भी उससे मुंह नहीं मोड़ा। उनका उद्देश्य हमेशा यही रहा कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया या किसी अनियमितता की वजह से प्रभावित न हो।
नीट में सुधार के लिए उठाए गए कदम
प्रधान ने अपने पत्र में बताया कि नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ियों की जानकारी मिलते ही केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई की। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई, परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित कराई गई और अगले वर्ष से परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) मोड में कराने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराना रही।
‘युवाओं का भविष्य राजनीति से बड़ा’
उन्होंने कहा कि 16 जुलाई को घोषित परिणामों में बड़ी संख्या में गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों ने सफलता हासिल की। इसके बावजूद देश में जिस तरह का माहौल बना, वह चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि छात्रों के आंदोलन का लाभ कोई राष्ट्रविरोधी ताकत उठाए या विद्यार्थियों का भविष्य कानूनी विवादों में उलझ जाए। इसी सोच के साथ उन्होंने त्यागपत्र देने का निर्णय लिया।
प्रधानमंत्री का जताया आभार
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और विश्वास के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पद छोड़ने के बाद भी राष्ट्रसेवा, शिक्षा सुधार और युवाओं के हित में उनका समर्पण पहले की तरह जारी रहेगा। उनके इस्तीफे को नीट विवाद के बाद केंद्र सरकार का सबसे बड़ा राजनीतिक फैसला माना जा रहा है और अब सभी की नजर नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर टिकी है।


