टीएमसी के 20 सांसदों को बैठक में बुलाने का विरोध करते हुए किया वॉकआउट…केंद्र सरकार को घेरने के लिए विपक्ष एकजुटता के साथ तैयार…
चढ़ावा चोरी, पेपर लीक, ई20 पर बवाल तय!
New delhi । ।संसद का मॉनसून सत्र सोमवार को हंगामेदार तरीके से शुरू होने वाला है। विपक्ष परीक्षा पेपर लीक, एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के विरोध प्रदर्शन, अयोध्या में राम मंदिर में कथित दान की चोरी, पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब अप्रैल में संसद के दोनों सदनों की पिछली बैठक के बाद से विपक्ष का ही रूप बदल गया है। चार विपक्षी पार्टियों के करीब 37 सांसदों ने भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए का साथ दिया है। इससे सरकार को संख्या बढ़ाने में मदद मिल सकती है क्योंकि वह महिला आरक्षण एक्ट को लागू करने और संसद और राज्य विधानसभाओं की ताकत बढ़ाने के लिए एक कानूनी पैकेज फिर से पेश करना चाहती है। अप्रैल में लोकसभा टेस्ट में इसकी कोशिशें फेल हो गई थीं। इसके बाद विपक्षी पार्टियों में हुई फूट ने एनडीए गठबंधन की संख्या बढ़ा दी है, लेकिन विपक्षी खेमे में कड़वाहट और मनमुटाव की भावना को बढ़ा दिया है।
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले रविवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक राजनीतिक टकराव की भेंट चढ़ गई। बैठक में उस समय विवाद खड़ा हो गया जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से अलग हुए 20 बागी सांसदों के नए गुट के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया। इसे लेकर कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी, डीएमके, शिवसेना (यूबीटी), आम आदमी पार्टी, लेफ्ट समेत अधिकांश विपक्षी दलों ने विरोध जताते हुए बैठक से वॉकआउट कर दिया। हालांकि कुछ देर बाद सभी दल दोबारा बैठक में शामिल हो गए। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। इसमें करीब 40 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
बागी सांसदों को बुलाए जाने से नाराज विपक्ष
हालांकि सरकार के सूत्रों ने कहा कि संसद में तेजी से बदलते हालात को देखते हुए बिल पेश करने से पहले उसे वेट-एंड-वॉच अप्रोच अपनाना होगा। रविवार को विपक्ष ने सर्वदलीय बैठक से वॉकआउट कर दिया क्योंकि सरकार ने तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट को बुलाया था, जिसका नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया नाम के एक राजनीतिक दल में विलय हो गया है। डीएमके और आम आदमी पार्टी इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल नहीं हो रही हैं।
सर्वदलीय बैठक में हुए इस विवाद ने साफ संकेत दे दिए हैं कि सोमवार से शुरू हो रहा संसद का मानसून सत्र हंगामेदार रहने वाला है। विपक्ष जहां टीएमसी के बागी सांसदों के मुद्दे, अयोध्या, मणिपुर, किसानों और अन्य राष्ट्रीय विषयों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं सरकार विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने और सदन को सुचारु रूप से चलाने पर जोर दे रही है। ऐसे में सत्र की शुरुआत से पहले ही राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है और आने वाले दिनों में संसद के भीतर तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है।
सुर्खियों में राम मंदिर में कथित चोरी का मामला
विपक्ष राम मंदिर में कथित चोरी का मामला भी उठाने की योजना बना रहा है। उसे उम्मीद है कि इसका भाजपा के बड़े हिंदुत्व वोटर पर असर पड़ेगा। शनिवार को, राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े ने राम मंदिर विवाद पर पीएम मोदी को एक संयुक्त पत्र लिखा, जिसमें उन्हें याद दिलाया गया कि उन्होंने संसद में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बनाने का अनाउंसमेंट किया था और इसके सदस्य आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े माने जाते हैं।
पत्र में कहा गया कि ऐसे क्राइम के सामने अब आपकी चुप्पी मंज़ूर नहीं है। दोनों नेताओं ने ट्रस्ट के आर्थिक मामलों की इंडिपेंडेंट जांच और नतीजों को पब्लिक करने की मांग की। जहां विपक्ष अपनी कम होती संख्या के बावजूद सरकार को बैकफुट पर लाने की कोशिश करेगा, वहीं सरकार विपक्षी दलों में फूट का फायदा उठाएगी, जिससे मॉनसून सत्र में हंगामा होने की उम्मीद है।
-आज संसद मार्च…देशभर से पहुंच रहे युवा
-वांगचुक की अपील-आजादी की दूसरी लड़ाई, बड़ी संख्या में पहुंचे
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को तोडऩे की कोशिश और कॉकरोच जनता पार्टी के बुलाए गए सोमवार को संसद तक प्रस्तावित मार्च ने भी सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही माहौल को और गरमा दिया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस कदम की आलोचना की है। कुछ दिनों पहले कांग्रेस पार्लियामेंट्री पार्टी की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने पार्टी नेताओं से सोनम वांगचुक के लिए बोलने की अपील की थी जो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर है। उधर, संसद मार्च में शामिल होने के लिए देशभर से युवा दिल्ली पहुंच रहे हैं।
इस बीच सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल से जारी अपने हस्तलिखित संदेश में 20 जुलाई को होने वाले संसद मार्च को दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन करार दिया? उन्होंने छात्रों और नागरिकों से बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की,ताकि भय और अन्याय (जैसे प्रश्नपत्र लीक और उनकी कथित अवैध हिरासत) से मुक्ति पाई जा सके


