New delhi । सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसयू) के कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर ) फंड को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया है.सरकारी स्वामित्व वाली कई कंपनियों, विशेषकर (ओएनजीसी) ने पिछले एक दशक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (संघ) से जुड़े सहयोगी करीब 20 संगठनों को सैकड़ों करोड़ रुपये का सीएसआर फंड से अनुदान दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार ओएनजीसी ने वर्ष 2013 से 2025 के बीच सीएसआर फंड से लगभग 668 करोड़ ऐसे 20 संगठनों को दिए हैं.जो संघ से संबद्ध या उससे जुड़े व्यक्तियों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। सबसे बड़ी राशि असम के एक अस्पताल तथा कुछ शैक्षणिक एवं सेवा संस्थानों को दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है, 2015 से 2025 के दौरान ओएनजीसी ने लगभग 4,531 करोड़ का सीएसआर फंड दिया है. जिसमें लगभग 14.7 प्रतिशत राशि इन 20 संस्थाओं को दी गई गई है।
इस खुलासे के बाद विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है.
सार्वजनिक धन का उपयोग वैचारिक रूप से जुड़े संगठनों को दिया गया है. विपक्ष ने मांग की है. सभी पीएसयू द्वारा दिए गए सीएसआर फंड की स्वतंत्र जांच कराई जाए. लाभार्थी संस्थाओं के चयन की प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए। विपक्ष के इस आरोप पर सरकार का कहना है. कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत सीएसआर फंड देने के लिए चयन संबंधित कंपनी का निदेशक मंडल करता है. यह प्रक्रिया निर्धारित नियमों एवं पात्रता के आधार पर संचालित होती है।
उल्लेखनीय है, विभिन्न मंत्रालयों और संसद में प्रस्तुत उत्तरों के अनुसार, पीएसयू हर वर्ष शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, पर्यावरण तथा ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में हजारों करोड़ रुपये सीएसआर मद से खर्च करते हैं।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। आरोपों पर संबंधित संस्थाओं या सभी लाभार्थी संगठनों की ओर से प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।


