जनसुनवाई में आए प्रार्थना पत्रों का समयबद्ध निस्तारण करने के निर्देश, पात्रों को योजनाओं का लाभ दिलाने पर जोर
Kanpur । अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से जुड़े उत्पीड़न के मामलों में अब कार्रवाई में देरी अधिकारियों पर भारी पड़ सकती है। शुक्रवार को सर्किट हाउस में हुई समीक्षा बैठक में उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य रमेश चंद्र कुंडे ने अधिकारियों को ऐसे मामलों में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई में आने वाली शिकायतों को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि पीड़ितों को प्रभावी राहत भी मिले।

आयोग सदस्य ने संबंधित विभागों के अधिकारियों से एससी-एसटी वर्ग के उत्पीड़न से जुड़े मामलों की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने लंबित प्रकरणों की समीक्षा कर निर्धारित समय में निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही शासन की योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक बिना किसी बाधा के पहुंचाने और योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए।
अपर नगर आयुक्त को समन
बैठक के दौरान एक प्रकरण में आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए अपर नगर आयुक्त को समन जारी किया। उन्हें संबंधित मामले के आवश्यक साक्ष्यों के साथ आयोग के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए गए। सदस्य ने कहा कि शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनसुनवाई में प्राप्त प्रत्येक प्रार्थना पत्र को गंभीरता से लिया जाए। शिकायतकर्ता को कार्रवाई की जानकारी देने के साथ ही उसे समय से राहत दिलाना सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में अपना दल (एस) के जिलाध्यक्ष राम प्रताप पाल, पीआरओ सुधीर कुमार, राजेश सचान सहित पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।


