कानपुर में फर्जी नायब सूबेदार गिरफ्तार, मिलिट्री इंटेलीजेंस के इनपुट पर खुली ठगी की परतें
Kanpur । सेना की वर्दी, सोशल मीडिया पर रौबदार तस्वीरें और कैंट इलाके तक पहुंच सब कुछ इतना असली कि कोई भी धोखा खा जाए। लेकिन यह पूरा खेल फर्जी निकला। मिलिट्री इंटेलीजेंस के इनपुट पर चकेरी पुलिस ने ऐसे शातिर को गिरफ्तार किया है, जो खुद को आर्मी का नायब सूबेदार बताकर युवाओं से नौकरी के नाम पर लाखों रुपये ठग रहा था। आरोपी की पहचान गोरखपुर के पिपरही गांव निवासी शिवम यादव उर्फ कुणाल सिंह यादव के रूप में हुई है।

जांच में सामने आया कि आरोपी एआई तकनीक की मदद से सेना की वर्दी और हथियारों के साथ अपनी तस्वीरें तैयार करता था। इन्हें वह सोशल मीडिया और व्हाट्सएप डीपी पर लगाकर खुद को असली फौजी अफसर बताता था। उसके झांसे में आने वाले युवाओं को स्पोर्ट्स कोटे से सेना में भर्ती कराने का लालच दिया जाता था।
पहले रेसलिंग सर्टिफिकेट बनवाने के नाम पर 10 से 20 हजार रुपये वसूले जाते, फिर नौकरी दिलाने के नाम पर 6 से 10 लाख रुपये तक की ठगी की जाती थी।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने कानपुर के चकेरी और गोरखपुर में कथित ऑफिस भी बना रखे थे, जहां वह युवाओं और उनके परिजनों को बुलाकर भरोसा दिलाता था। इतना ही नहीं, उसके पास से सेना की वर्दी, फर्जी आईडी कार्ड, कैंटीन कार्ड और कई मोहरें बरामद हुई हैं। इन्हीं के जरिए वह कानपुर कैंट क्षेत्र में भी प्रवेश कर जाता था, जिससे लोगों का उस पर भरोसा और मजबूत हो जाता था।
हैरानी की बात यह है कि उसके परिवार, गांव और रिश्तेदार भी उसे सेना का अधिकारी मानते थे। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह स्टेट लेवल का रेसलर है और सेना में भर्ती होना चाहता था, लेकिन असफल रहने पर उसने फर्जी अफसर बनकर ठगी शुरू कर दी। शुरुआत में उसे समाज में सम्मान मिला, लेकिन धीरे-धीरे यह उसका धंधा बन गया। फिलहाल पुलिस ने आरोपी को जेल भेज दिया है और उसके नेटवर्क के साथ-साथ पीड़ितों की तलाश की जा रही है।


