यूपी में 34 हजार मेगावाट बिजली आपूर्ति का लक्ष्य
Lucknow । भीषण गर्मी के दौरान बिजली संकट से निपटने के लिए योगी सरकार ने इस बार पहले से व्यापक तैयारियां कर ली हैं। प्रदेश में करीब 34 हजार मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने की रणनीति तैयार की गई है, ताकि उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली मिल सके और कटौती की नौबत न आए।
पीक डिमांड का अनुमान
ऊर्जा विभाग के मुताबिक इस वर्ष जून में बिजली की मांग 33,375 मेगावाट तक पहुंच सकती है, जो अब तक के उच्चतम स्तरों में से एक होगी। मई और जुलाई में भी मांग 31 से 32 हजार मेगावाट के बीच रहने की संभावना है। बढ़ती मांग को देखते हुए विभाग ने उत्पादन और आपूर्ति के सभी स्रोतों को पहले से सक्रिय कर दिया है।
थर्मल प्लांटों से बढ़ी क्षमता
प्रदेश के घाटमपुर, खुर्जा, पनकी, ओबरा और जवाहरपुर जैसे प्रमुख थर्मल पावर प्रोजेक्ट से बिजली उत्पादन शुरू हो चुका है। इन परियोजनाओं के चालू होने से राज्य की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। घाटमपुर की तीसरी यूनिट 30 अप्रैल तक चालू होने की उम्मीद है, जिससे बिजली आपूर्ति को और मजबूती मिलेगी।
एमओयू और एक्सचेंज से सप्लाई
अधिकारियों के अनुसार पीक ऑवर में करीब 80 प्रतिशत बिजली की जरूरत पहले से किए गए लॉन्ग टर्म एमओयू के जरिए पूरी की जाएगी। इसके अलावा अतिरिक्त मांग को पूरा करने के लिए बिजली एक्सचेंज प्लेटफॉर्म—आईईएक्स, पीएक्सआईएल और एचपीएक्स—का सहारा लिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर इन प्लेटफॉर्म से बिजली खरीदी जाएगी, जिससे आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बना रहेगा।
बैंकिंग व्यवस्था भी सहायक
राज्य ने अन्य प्रदेशों के साथ 4,663 मिलियन यूनिट बिजली की बैंकिंग व्यवस्था भी की है। इसके तहत जरूरत पड़ने पर अन्य राज्यों से बिजली ली जा सकेगी और बाद में लौटाई जाएगी। यह व्यवस्था आपात स्थिति में सप्लाई को स्थिर बनाए रखने में मदद करेगी।
सीएम के निर्देश पर कड़ी निगरानी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी हाल में उपभोक्ताओं को परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए नियमित समीक्षा बैठकों के जरिए तैयारियों की निगरानी की जा रही है।
नेटवर्क सुधार और स्मार्ट मॉनिटरिंग
ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि तकनीकी खराबियों से आपूर्ति बाधित न हो। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए फीडर स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है। साथ ही लाइन लॉस कम करने, स्मार्ट मीटरिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को तेजी से लागू किया जा रहा है।


