वन विभाग और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में तस्कर गिरफ्तार, कोर्ट के आदेश पर सभी संरक्षित कछुओं को गंगा में छोड़ा गया
Kanpur । हरवंश मोहाल क्रॉसिंग पर एक काले बैग ने वन विभाग और एसटीएफ की संयुक्त टीम को बड़ी सफलता दिला दी। सूचना के आधार पर चलाए गए विशेष अभियान में टीम ने एक संदिग्ध युवक को रोककर तलाशी ली तो बैग के भीतर 171 दुर्लभ इंडियन रूफ्ड टर्टल (पैंगशुरा टेक्टा) मिले। ये सभी कछुए भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में शामिल संरक्षित प्रजाति के हैं। कार्रवाई के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जबकि सभी कछुओं को न्यायालय के आदेश पर उनके प्राकृतिक आवास गंगा नदी में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी प्रभाग, कानपुर नगर ने बताया कि 18 जुलाई को तस्करी की सूचना मिलने पर वन विभाग और एसटीएफ मुख्यालय, लखनऊ की संयुक्त टीम ने हरवंश मोहाल क्रॉसिंग के आसपास घेराबंदी की। इसी दौरान काले रंग का बैग लिए एक व्यक्ति संदिग्ध हालत में दिखाई दिया। जब बैग की तलाशी ली गई तो उसमें एक-दो नहीं बल्कि 171 जीवित कछुए मिले। टीम ने तत्काल उन्हें अपने कब्जे में लेकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम जाहिद अली, निवासी भटपुरा, थाना कमालगंज, जनपद फर्रुखाबाद बताया। उसके खिलाफ भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 9, 39, 40, 48(ए), 51 और 57 के तहत विभागीय प्रकरण दर्ज किया गया। बाद में उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
वन अधिकारियों के अनुसार इंडियन रूफ्ड टर्टल देश की संरक्षित प्रजातियों में शामिल है। इनका शिकार करना, अवैध रूप से अपने कब्जे में रखना या खरीद-फरोख्त करना गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।मामले में बरामद सभी 171 कछुओं को माननीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कानपुर के आदेश के अनुपालन में वन विभाग कानपुर नगर और फर्रुखाबाद की संयुक्त टीम की निगरानी में फर्रुखाबाद के पंचालघाट स्थित गंगा नदी में उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
अधिकारियों ने कहा कि वन्यजीवों की तस्करी रोकने के लिए ऐसे अभियान आगे भी लगातार चलाए जाएंगे, ताकि संरक्षित प्रजातियों को सुरक्षित रखा जा सके और तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।


