वही टीम जीतेगी जिसके कोच की रणनीति बेहतर होगी
Mumbai । बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन भी फीफा विश्वकप फुटबॉल के खुमार से बच नहीं पाये हैं। बिग बी ने कहा कि सेमीफाइनल में पहुंचने के बाद सभी खिलाड़ी अपने आप में सुपरस्टार होते हैं और उनकी व्यक्तिगत क्षमता अतुलनीय होती है। इसलिए वही टीम जीतेगी जिसके कोच की रणनीति और गेम प्लान में अधिक दम और स्पष्टता होगी। फाइनल सिर्फ खिलाड़ियों का नहीं, बल्कि रणनीतिकारों का भी सीधा मुकाबला है।
बच्चन ने लिखा है कि जब कोई चैंपियनशिप अपने बिल्कुल अंतिम पड़ाव पर पहुंच जाती है और मुकाबला करने के लिए सिर्फ चार सर्वश्रेष्ठ टीमें शेष रह जाती हैं, तो यह भविष्यवाणी करना अत्यंत कठिन हो जाता है कि जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा। अक्सर लोग अपनी पसंदीदा टीम के प्रति अपने गहरे भावनात्मक जुड़ाव और प्यार को देखकर ही जीत की भविष्यवाणी कर बैठते हैं।
हालांकि, सच्चाई यह है कि इस स्टेज पर हम जिन चुनिंदा 44 खिलाड़ियों की बात कर रहे होते हैं, वे सभी अपने-अपने क्षेत्र के माहिर खिलाड़ी और सुपरस्टार होते हैं। एक व्यक्तिगत प्लेयर के तौर पर उनकी काबिलियत या हैसियत को किसी भी सूरत में कम करके नहीं आंका जा सकता। वे सभी विश्व स्तरीय प्रदर्शन के आदी होते हैं।
बिग बी का तर्क है कि ऐसे में असली जरूरत इस बात की होती है कि इन असाधारण स्टार खिलाड़ियों को मैदान पर किस प्रकार प्रबंधित और निर्देशित किया जाता है।
यहीं पर एक कोच या मैनेजर का वास्तविक और निर्णायक रोल शुरू होता है। इसी वजह से फाइनल मुकाबला असल मायने में स्पेनिश कोच और अर्जेंटीना के कोच के बीच की रणनीतिक लड़ाई होगी। उनकी क्या योजनाएं हैं, वे मैच के लिए क्या रणनीति बनाते हैं, और खिलाड़ी उन योजनाओं को मैदान पर कितनी सटीकता और प्रभावशीलता से लागू करते हैं, यही तत्व अंततः जीत-हार का फैसला करेंगे।
एक कोच की बनाई योजनाएं मैदान पर स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती हैं, और दूसरा कोच उन्हें समझकर अपनी प्रभावी पलटवार योजना (काउंटर प्लान) तैयार करता है, जिससे खेल में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहता है और दर्शक पल-पल रोमांच का अनुभव करते हैं।
अमिताभ ने इंग्लैंड के खिलाफ अर्जेंटीना के एक महत्वपूर्ण मैच का जिक्र करते हुए उनके कोच के एक बेहद साहसी और निडर फैसले की जमकर तारीफ की। उन्होंने बताया कि उस मैच के आखिरी तीन मिनट में जब खेल बिल्कुल फंसा हुआ था और ड्रॉ की ओर बढ़ रहा था, तब अर्जेंटीना के कोच ने स्थिति को संभालने या ड्रॉ बचाने के लिए किसी डिफेंडर को मैदान पर भेजने के बजाय, एक अतिरिक्त स्ट्राइकर को उतारने का जोखिम भरा निर्णय लिया। यह एक बहुत ही रिस्की, लेकिन साथ ही अत्यंत निडर गेम मैनेजमेंट का उत्कृष्ट उदाहरण था। उन्होंने ओवरटाइम का इंतजार करने के बजाय, सीधे अटैक करने का फैसला किया, और उनके इसी साहसी कदम ने मैच का पासा पलट दिया, जिससे उनकी टीम को निर्णायक बढ़त मिली और वे जीत दर्ज करने में सफल रहे।


