छापे में खुली बिचौलियों की सक्रियता की परतें, नकदी और रिकॉर्ड के मिलान में भी गड़बड़ी
Kanpur । एआरटीओ कार्यालय में सोमवार को अचानक पुलिस-प्रशासन की टीम पहुंची तो वहां अफरातफरी मच गई। टीम ने कार्यालय और आसपास मौजूद लोगों की जांच शुरू की। कार्रवाई में 11 संदिग्ध दलालों को हिरासत में लिया गया। अब उनसे पूछताछ के जरिये यह पता लगाया जा रहा है कि वे आवेदकों से कैसे संपर्क करते थे और कार्यालय के भीतर किन लोगों के संपर्क में थे।

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम सदर अनुभव सिंह और एडीसीपी दक्षिण सुमित सुधाकर राम टेके के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने छापा मारा। टीम ने वाहन पंजीकरण, स्वामित्व अंतरण, फिटनेस, परमिट, कर-शुल्क और ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े कामकाज की पड़ताल की। वाहन और सारथी पोर्टल पर होने वाली प्रक्रियाओं की भी जांच की गई।
कार्रवाई के दौरान सिर्फ संदिग्ध लोगों की धरपकड़ ही नहीं हुई, बल्कि कार्यालय के रिकॉर्ड भी खंगाले गए। नकदी रजिस्टर, शुल्क प्राप्तियों और अभिलेखों का मिलान कराया गया। शुरुआती जांच में नकदी और रिकॉर्ड के बीच कुछ विसंगतियां सामने आईं। इनका दोबारा मिलान कर जिम्मेदारी तय की जा रही है।
अब जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि आखिर इन बिचौलियों की कार्यालय में इतनी सक्रियता कैसे थी। क्या उन्हें किसी कर्मचारी या अधिकारी का सहयोग मिल रहा था, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। प्रशासन ने साफ किया है कि जांच में मिलीभगत या वित्तीय अनियमितता सामने आने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि लोगों को सरकारी सेवाएं निर्धारित प्रक्रिया, समयसीमा और तय शुल्क पर सीधे मिलनी चाहिए। बिचौलियों के जरिये काम कराने की व्यवस्था किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।


