Kanpur । खुद को पुलिस, सीबीआई और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाने वाले अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का कमिश्नरेट पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। थाना शिवराजपुर पुलिस और साइबर क्राइम सेल की संयुक्त कार्रवाई में गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का दावा है कि यह गैंग पिछले करीब तीन वर्षों से देशभर में सक्रिय था और 15 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी कर चुका है।
जांच के अनुसार आरोपी लोगों को फोन या वीडियो कॉल कर खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताते थे। इसके बाद पीड़ितों को किसी फर्जी आपराधिक मामले में फंसने, गिरफ्तारी वारंट जारी होने या बैंक खाते सीज किए जाने का भय दिखाया जाता था।
कई बार लोगों को घंटों तक वीडियो कॉल पर रखकर डिजिटल अरेस्ट जैसी स्थिति बनाई जाती थी। डर और मानसिक दबाव में आकर पीड़ित आरोपी द्वारा बताए गए खातों में रकम ट्रांसफर कर देते थे।
2500 लोगों को बनाया शिकार
एनसीआरपी और प्रतिबिंब पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक गिरोह ने देशभर में लगभग 2500 लोगों को अपना शिकार बनाया। पुलिस जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को छिपाने के लिए आरोपी पी2पी ट्रेडिंग के माध्यम से यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) में परिवर्तित कर देते थे, जिससे धनराशि का ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था।
450 फर्जी खातों का इस्तेमाल
पुलिस के अनुसार गिरोह ने ठगी के पैसों के लेनदेन के लिए 450 से अधिक फर्जी और किराए के बैंक खातों का उपयोग किया। इन खातों के जरिए रकम को कई स्तरों पर ट्रांसफर कर उसका स्रोत छिपाया जाता था।
मोबाइल, पासबुक और एटीएम कार्ड बरामद
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अशरफ खान, सूरज कुमार, राजन कटियार, राजदीप, भीमरतन कुमार और कमल के रूप में हुई है। उनके कब्जे से पांच मोबाइल फोन, एक टैबलेट, 10 बैंक पासबुक, दो चेकबुक और12 एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक गिरोह के खिलाफ उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, तमिलनाडु, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में भी शिकायतें दर्ज हैं। आरोपियों के विरुद्ध बीएनएस की धारा 308(2), 318(4) तथा आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। सराहनीय कार्रवाई के लिए पुलिस टीम को 25 हजार रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।


