फाइलें कब्जे में लेकर चीफ इंजीनियर समेत कई अधिकारियों से पूछताछ, कैला देवी फर्म के भुगतान दस्तावेजों में मिलीं खामियां
Kanpur । नगर निगम के टेंडर सिंडिकेट की परतें खोलने में जुटी एसआईटी ने बुधवार को निगम मुख्यालय पहुंचकर जांच का दायरा बढ़ा दिया। एडीसीपी सेंट्रल डॉ. अर्चना सिंह के नेतृत्व में पहुंची टीम ने सबसे पहले चीफ इंजीनियर कार्यालय में दस्तक दी। टेंडर, भुगतान और फर्मों के पंजीकरण से जुड़ी फाइलें कब्जे में लेकर टीम ने एक-एक दस्तावेज खंगालना शुरू किया। कैला देवी फर्म से जुड़े भुगतान दस्तावेजों में कई कमियां और संदिग्ध तथ्य सामने आने पर उनकी फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई गई।
एसआईटी ने चीफ इंजीनियर एसएफए जैदी, अधिशासी अभियंता दिवाकर भास्कर और आरके सिंह समेत अन्य संबंधित अधिकारियों से लंबी पूछताछ की। अधिकारियों से टेंडर जारी करने से लेकर फर्म के चयन, काम आवंटन और भुगतान की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली गई। टीम यह भी जानने में जुटी रही कि संदिग्ध फर्मों को काम दिलाने में किस स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई।
100 करोड़ के टेंडर पहले ही निरस्त
कथित टेंडर सिंडिकेट के खिलाफ नगर निगम पहले ही बड़ी कार्रवाई कर चुका है। नगर आयुक्त करीब 100 करोड़ रुपये के संदिग्ध टेंडर निरस्त कर चुके हैं। मामले में सात आरोपी फर्मों के खिलाफ छह प्राथमिकी दर्ज हो चुकी हैं। दो ठेकेदारों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। वहीं, कथित मास्टरमाइंड गोविंद शर्मा अभी पुलिस की पकड़ से बाहर है। उसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
बैंक खातों तक पहुंचेगी जांच
एसआईटी की जांच अब केवल टेंडर फाइलों तक सीमित नहीं है। टीम फर्मों के पंजीकरण, टेंडर आवंटन, भुगतान की प्रक्रिया और बैंक खातों में हुए लेनदेन की भी पड़ताल कर रही है। खासतौर पर यह देखा जा रहा है कि नगर निगम से जारी भुगतान किन खातों में पहुंचा और रकम के लेनदेन का संबंध मामले में सामने आई फर्मों से तो नहीं है।
अधिकारियों की भूमिका भी जांच के केंद्र में है।
पुलिस का दावा है कि दस्तावेजों और पूछताछ से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जाएगी। एसआईटी की कार्रवाई से निगम में टेंडर प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों में खलबली मची रही। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद मामले में कुछ और लोगों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है।


