कानपुर में 26 से 30 नवंबर तक होगा आयोजन
बृजेंद्र स्वरूप पार्क में जुटेंगे सेवा संगठनों के प्रतिनिधि
संस्कृति, सेवा, संस्कार, नारी सम्मान, युवा जागरण और राष्ट्रभाव पर रहेगा फोकस
सीएम योगी के साथ-साथ देशभर के संतों और विशिष्ट अतिथियों के शामिल होने की संभावना
Kanpur । भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा के साथ समाज सेवा के विभिन्न आयामों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से ‘हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला-2026’ का आयोजन कानपुर में किया जा रहा है। 26 से 30 नवंबर तक बृजेंद्र स्वरूप पार्क में होने वाले इस पांच दिवसीय मेले में विभिन्न सामाजिक और सेवा संस्थाओं की गतिविधियों को प्रदर्शित किया जाएगा। आयोजन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी शामिल होने की संभावना है।
आयोजन का उद्देश्य
आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति, सेवा-भाव, संस्कार, नारी सम्मान, युवा जागरण और राष्ट्रभाव को समाज के व्यापक वर्ग, खासकर युवाओं तक पहुँचाना है। इसके जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, पशु-पक्षी सेवा, महिला सशक्तीकरण, संस्कृति एवं संस्कार तथा जरूरतमंदों की सहायता जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली संस्थाओं को एक साझा मंच उपलब्ध कराया जाएगा।
आयोजन में भाग लेने वाले प्रमुख लोग
आयोजकों के अनुसार, मेले में देश के प्रमुख संतों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े विशिष्ट व्यक्तियों की सहभागिता होगी। इनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज और स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज सहित अन्य संत-धर्माचार्य एवं अलग-अलग क्षेत्रों में समाज का नेतृत्व करने वाले गणमान्य लोग शामिल होंगे।
400 से अधिक सेवा संगठन लगाएँगे प्रदर्शनी
आयोजन में 400 से अधिक सेवा संगठनों की प्रदर्शनी प्रमुख आकर्षण होगी। इन संस्थाओं की ओर से समाज सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी जाएगी। आयोजकों ने मेले को केवल प्रदर्शनी तक सीमित न रखकर सेवा और संस्कार को जन-अभियान से जोड़ने की योजना बनाई है।
इन विषयों पर रहेगा विशेष फोकस
मेले की मुख्य थीम में छह प्रमुख विषयों को शामिल किया गया है।
*संस्कृति*: भारतीय संस्कृति और परंपराओं का परिचय
*सेवा*: समाज सेवा की भारतीय परंपरा को जन-जन तक पहुँचाना
*संस्कार*: युवा पीढ़ी में चरित्र और मूल्य आधारित जीवन का संदेश
*नारी सम्मान*: मातृशक्ति और कन्या सम्मान को सामाजिक अभियान बनाना
*युवा जागरण*: विद्यार्थियों और युवाओं को राष्ट्र निर्माण तथा स्वामी विवेकानंद के विचारों से जोड़ना
*राष्ट्रभाव*: वंदे मातरम् और राष्ट्रीय चेतना के माध्यम से जन-जागरण
गंगा आरती से लेकर सांस्कृतिक संध्या तक
मेले में प्रतिदिन विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे।
इनमें गंगा अवतरण, गंगा आरती, कन्या वंदन, मातृ-पितृ वंदन, आचार्य वंदन और अतिथि वंदन जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। विश्वस्तरीय कलाकारों द्वारा प्रतिदिन सांस्कृतिक संध्या भी आयोजित की जाएगी।
इसके अलावा काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या धाम और वृंदावन धाम के विग्रहों के दर्शन, युवा पीढ़ी में भक्ति भाव जगाने के लिए भजन संध्या, नारी स्वाभिमान जागरण के लिए ‘रानी लक्ष्मीबाई’ नाट्य मंचन तथा देशभक्ति भाव जागरण के लिए परमवीर चक्र विजेताओं का वंदन भी प्रस्तावित है। मेले में आगंतुकों को भारतीय व्यंजनों का स्वाद भी मिलेगा।
आयोजन से पूर्व जागरूकता के लिए होंगे कई कार्यक्रम
आयोजन को लेकर शहर में जागरूकता अभियान पहले ही शुरू किया जाएगा। इसके तहत विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के बीच विभिन्न प्रतियोगिताएँ, स्वामी विवेकानंद रथयात्रा, शारदीय नवरात्र में पंचमी, षष्ठी और सप्तमी को नारी सम्मान अभियान के तहत कन्या वंदन तथा 31 अक्टूबर को एक लाख से अधिक विद्यार्थियों के साथ सामूहिक वंदे मातरम् गायन जैसे कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।आयोजकों के अनुसार इन गतिविधियों का उद्देश्य मेले को केवल पाँच दिनों के आयोजन तक सीमित न रखकर, उससे पहले ही शहर के विद्यार्थियों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और आम लोगों को इस अभियान से जोड़ना है।
सेवा संस्थाओं को मिलेगा साझा मंच
आयोजन में शिक्षा, चिकित्सा, पर्यावरण, पशु-पक्षी सेवा, महिला सशक्तीकरण, संस्कृति एवं संस्कार और जनकल्याण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं की सक्रिय सहभागिता होगी। इसका उद्देश्य सेवा कार्यों को परस्पर जोड़ना और समाज के सामने उनके प्रयासों को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना है। आयोजकों ने सेवा क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, विद्यार्थियों, युवाओं और आम नागरिकों से मेले में सहभागिता की अपील की है।


