1097 भिखारियों के सर्वे के बाद प्रशासन एक्शन मोड में, हॉटस्पॉट चिह्नित कर चलेगा रेस्क्यू व पुनर्वास अभियान
Kanpur शहर के व्यस्त चौराहों पर वाहनों के बीच हाथ फैलाते बच्चे और बाजारों में भीख मांगती महिलाएं अब सिर्फ ट्रैफिक का हिस्सा नहीं रहेंगी। प्रशासन ने ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में बड़ा अभियान शुरू करने की तैयारी कर ली है। समाज कल्याण विभाग के सर्वे में 1097 भिखारियों की पहचान होने के बाद अब शहर के उन स्थानों को हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया जाएगा, जहां रोजाना सबसे अधिक भिक्षावृत्ति होती है।
सर्वे के मुताबिक 494 पुरुष, 368 महिलाएं और 235 बच्चे भीख मांगते मिले हैं। रिपोर्ट एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट समेत संबंधित विभागों को सौंप दी गई है। अब संयुक्त टीमें चौराहों, मंदिरों, बाजारों और अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में पहुंचकर सत्यापन करेंगी। यह भी जांच होगी कि कौन लोग स्थायी रूप से शहर में रहकर भीख मांग रहे हैं और कौन दूसरे राज्यों से मौसमी तौर पर यहां आते हैं।
प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता भीख मांगते बच्चों को लेकर है। अभियान के दौरान ऐसे बच्चों को रेस्क्यू कर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उनकी पारिवारिक स्थिति की जांच कर शिक्षा, संरक्षण और पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी ताकि वे फिर से भिक्षावृत्ति की ओर न लौटें। महिलाओं और अन्य जरूरतमंद लोगों को भी सरकारी योजनाओं से जोड़ने की योजना है।
सर्वे में यह भी सामने आया कि मध्यप्रदेश के रीवा समेत कुछ क्षेत्रों से लोग खेती का काम समाप्त होने के बाद कुछ महीनों के लिए कानपुर आकर भीख मांगते हैं। प्रशासन अब इनके शहर आने के कारणों और संभावित संगठित नेटवर्क की भी पड़ताल करेगा।
अधिकारियों का कहना है कि सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न विभागों के सहयोग से चलने वाला यह अभियान केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरूरतमंदों के पुनर्वास और बच्चों को सुरक्षित भविष्य देने पर विशेष जोर होगा। शहर को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।


