Saturday, September 19, 2026
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Kanpur :रिंकी के दरवाजे पहुंचा समाधान, लौट आई चेहरे पर मुस्कान

 

एक समाधान दिवस से दूसरे तक बदली जिंदगी, कच्चे घर की जगह बन रहा पक्का आशियाना, रसोइया की नौकरी से मिला रोजगार का सहारा

Kanpur । 18 किलोमीटर पैदल चलकर अपनी फरियाद लेकर पहुंची रिंकी मिश्रा को शायद तब अंदाजा नहीं था कि एक दिन उसकी समस्या का समाधान देखने जिलाधिकारी खुद उसके घर पहुंचेंगे। 18 जुलाई को घाटमपुर के संपूर्ण समाधान दिवस में डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह से मिलने पहुंची रिंकी की जिंदगी शनिवार तक काफी बदल चुकी थी। इस बार उसे अपनी फरियाद लेकर कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ी। डीएम खुद बिरसिंहपुर स्थित उसके घर पहुंचे और पक्के मकान के निर्माण की प्रगति देखी।

 

रिंकी के कच्चे घर की जगह अब पक्के आशियाने की दीवारें खड़ी हो चुकी हैं। जल्द ही लिंटर डाले जाने की तैयारी है। डीएम ने निर्माण कार्य देखा और परिवार से बातचीत कर उनकी जरूरतों की जानकारी ली। कभी कमजोर छत और घर के खर्च की चिंता में घिरी रहने वाली रिंकी के चेहरे पर अब संतोष और उम्मीद दिखाई दी।

रिंकी (41) के पति राजीव मिश्रा की करीब दस वर्ष पहले आकस्मिक मृत्यु हो गई थी। इसके बाद दो बेटियों की जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई। बड़ी बेटी 16 वर्ष की है और पूर्णतः दिव्यांग है, जबकि छोटी बेटी अदिति 14 वर्ष की है। आय का स्थायी साधन नहीं होने से रिंकी के सामने बेटियों की पढ़ाई, इलाज और घर चलाने की चुनौती थी।

डीएम की पहल के बाद परिवार को कई सरकारी योजनाओं का लाभ मिला। अंत्योदय राशन कार्ड और रसोई गैस कनेक्शन मिला। निराश्रित महिला पेंशन शुरू हुई। आयुष्मान कार्ड से इलाज का सहारा मिला। दिव्यांग बेटी का यूनिक आईडी कार्ड बनवाया गया और दोनों बेटियों को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से जोड़ा जा रहा है।

रिंकी के लिए रोजगार मिलना भी बड़ी राहत बना। घर के पास प्राथमिक विद्यालय में उसे रसोइया की नौकरी मिल गई। इससे अब परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए उसके पास नियमित आय का जरिया है।

बेटी ने कहा- डीएम बनकर करूंगी लोगों की मदद
रिंकी की छोटी बेटी अदिति ने भी मां की मुश्किलों के बीच पढ़ाई जारी रखी। आर्थिक स्थिति को देखते हुए डीएम ने उसका पंडित राम यश मेमोरियल एजुकेशन सेंटर में प्रवेश कराया और फीस जमा कराई थी। कक्षा सात की छात्रा अदिति ने यूनिट टेस्ट में प्रथम स्थान हासिल किया है। डीएम के घर पहुंचने पर अदिति ने कहा कि वह बड़ी होकर डीएम बनना चाहती है और लोगों की मदद करना चाहती है।

पिछली बार फरियाद, इस बार घर पर मुलाकात
18 जुलाई को रिंकी बिरसिंहपुर से करीब 18 किलोमीटर पैदल चलकर घाटमपुर तहसील पहुंची थी। सुनवाई समाप्त होने के बाद जब डीएम अपनी गाड़ी की ओर बढ़ रहे थे, तभी रिंकी उनसे मिली। उसके पास प्रार्थना पत्र तक नहीं था। उसने अपनी परेशानी बताई तो डीएम ने अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

उसी दिन उपजिलाधिकारी घाटमपुर अबिचल प्रताप सिंह उसके घर पहुंचे और परिवार को तत्काल मदद उपलब्ध कराने के साथ पात्रता के अनुसार सरकारी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कराई। शनिवार को डीएम के घर पहुंचने पर रिंकी ने पिछली मुलाकात को याद करते हुए कहा कि तब वह उनके पास गई थी, आज डीएम साहब खुद उसके घर आए हैं।

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