138 करोड़ की नमामि गंगे परियोजना से जुलाई 2027 तक गंगा में प्रदूषित जल गिरने पर लगेगी रोक
Kanpur। मां गंगा को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाने की दिशा में नमामि गंगे परियोजना ने गति पकड़ ली है। इसी क्रम में कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी ने अपने आवास पर उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) और गंगा प्रदूषण नियंत्रण परियोजना से जुड़े अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर 14 नालों की टैपिंग और सीवेज प्रबंधन कार्यों की प्रगति का जायजा लिया।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार से स्वीकृत 138 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत पहले चरण में 14 नालों की टैपिंग का कार्य शुरू हो चुका है। इस चरण पर लगभग 70 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
परियोजना पूरी होने के बाद गंगा में सीधे गिरने वाले प्रदूषित जल को काफी हद तक रोका जा सकेगा, जिससे नदी की स्वच्छता में उल्लेखनीय सुधार आएगा।समीक्षा के दौरान सांसद रमेश अवस्थी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता न किया जाए और सभी कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएं।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना कानपुरवासियों की वर्षों पुरानी अपेक्षाओं से जुड़ी है और इसके पूरा होने से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ एवं अविरल गंगा के संकल्प को नई मजबूती मिलेगी।
अधिकारियों ने बताया कि परियोजना को जुलाई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के मुख्य अभियंता एस.के. सिंह और गंगा प्रदूषण नियंत्रण परियोजना के प्रबंधक मोहित चक ने भरोसा दिलाया कि सभी कार्य तय समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरे किए जाएंगे।
सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। इसे निर्मल और अविरल बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार और संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों से कानपुर में गंगा संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक परिणाम देखने को मिलेंगे।


