New delhi । भारतीय टी20 क्रिकेट टीम के कप्तान श्रेयस अय्यर ने अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज जीतने के बाद कहा है कि अब उनका लक्ष्य एशियाई खेलों में टीम को स्वर्ण पदक दिलाना है। श्रेयस पिछले कुछ समय में एक बेहतर कप्तान के तौर पर उभरे हैं।
अय्यर के नेतृत्व में भारतीय टीम ने लगातार छह मैचों में जीत दर्ज करके विरोधी टीमों के सामने एक बड़ी चुनौती पेश की है। इस शानदार सफर की शुरुआत जिम्बाब्वे के खिलाफ खेली गई सीरीज से हुई। जिम्बाब्वे दौरे पर भारतीय टीम ने घरेलू टीम को किसी भी मुकाबले में अवसर नहीं दिया।
अय्यर की समझदारी भरी रणनीति और गेंदबाजों का सही इस्तेमाल करने की कला के दम पर भारत ने वह सीरीज 3-0 से अपने नाम की। इस क्लीन स्वीप ने न केवल टीम के हौसले बुलंद किए, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के संतुलन को कैसे जीत में तब्दील किया जाता है।
जिम्बाब्वे के बाद भारतीय टीम ने अफगानिस्तान को आसानी से हरा दिया। श्रेयस की कप्तानी के आगे अफगान टीम की हर रणनीति असफल रही। अफगानिस्तान के खिलाफ खेली गई इस सीरीज में भी भारतीय टीम ने अपना दबदबा पूरी तरह कायम रखा और एक बार फिर 3-0 से सीरीज जीती। लगातार दो सीरीज में लगातार 3-3 मैच जीतकर अय्यर ने अपनी कप्तानी में लगातार 6 जीत का एक ऐसा मजबूत रिकॉर्ड खड़ा कर दिया, जो उनके नेतृत्व क्षमता पर मुहर लगाता है।
यह 6 मैच की अजेय बढ़त केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह श्रेयस के मैदान पर रहने वाले रवैये को दिखात है। एक कप्तान के तौर पर अय्यर स्थिति को बहुत जल्दी भांप लेते हैं।मैदान के भीतर और बाहर खिलाड़ियों से बातचीत करने का उनका तरीका बेहद सरल और प्रभावी है. वे अपने युवा गेंदबाजों को खुलकर गेंदबाजी करने की आजादी देते हैं और बल्लेबाजों को मैच की स्थिति के हिसाब से अपना स्वाभाविक खेल खेलने के लिए प्रेरित करते हैं।
जिम्बाब्वे और अफगानिस्तान दोनों ही सीरीज के दौरान यह साफ तौर पर देखा गया कि कठिन परिस्थितियों में भी कप्तान अय्यर ने अपने खिलाड़ियों का साथ नहीं छोड़ा, जिसका नतीजा यह रहा कि हर खिलाड़ी ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई और टीम ने लगातार छह मुकाबलों में जीत का परचम लहराया.अब उनका अगला बड़ा लक्ष्य एशियाई खेलों में जीत दर्ज करना रहेगा हालांकि एशियाई खेलों का मंच बड़ा है और वहां दबाव भी अलग तरह का होगा।


