18 किमी पाइपलाइन से रोज 40 एमएलडी शोधित पानी पहुंच रहा पनकी थर्मल पावर प्लांट
Kanpur। शहर में जल संरक्षण की दिशा में एक अहम पहल रंग ला रही है। बिनगवां स्थित टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट (टीटीपी) में सीवेज के शोधित पानी को उच्च गुणवत्ता का बनाकर पनकी थर्मल पावर प्लांट के कूलिंग सिस्टम में इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे पावर प्लांट के लिए ताजे पानी की जरूरत कम हो गई है और सिंचाई योग्य पानी किसानों के लिए सुरक्षित बच रहा है।

शनिवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने 40 एमएलडी क्षमता वाले टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि करीब 249.92 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस परियोजना के तहत बिनगवां के 210 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में सेकेंडरी ट्रीटमेंट के बाद पानी को टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाता है। यहां आरओ और यूएफ मेम्ब्रेन तकनीक से पानी का उन्नत शोधन किया जाता है, जिससे इसकी गुणवत्ता काफी बेहतर हो जाती है।

इसके बाद प्रतिदिन 40 एमएलडी शोधित पानी 18 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए पनकी थर्मल पावर प्लांट पहुंचाया जाता है। इस पानी का उपयोग कूलिंग टावर और बॉयलर में किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार उच्च गुणवत्ता का पानी इस्तेमाल होने से उपकरणों में स्केलिंग और जंग जैसी समस्याएं नहीं होतीं, जिससे संयंत्र की कार्यक्षमता बनी रहती है और रखरखाव का खर्च भी कम होता है।
डीएम ने बताया कि पहले शोधित सीवेज का बड़ा हिस्सा नदियों में चला जाता था, लेकिन अब उसका उपयोग बिजली उत्पादन में हो रहा है। इससे जल संरक्षण के साथ प्रदूषण नियंत्रण को भी बढ़ावा मिला है। उन्होंने बताया कि आरओ और यूएफ तकनीक पर आधारित यह उत्तर प्रदेश का पहला टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट है और भविष्य में इसे अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी मॉडल के रूप में अपनाया जा सकता है।


