सूत्रों के अनुसार, यह नई मंत्रिपरिषद क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। हालांकि पूरी सूची और विभागों का आधिकारिक आवंटन अभी अंतिम रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया है।
यह शपथ ग्रहण समारोह कोलकाता में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में राजनीतिक नेता, समर्थक और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इस घटनाक्रम को पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जहां लंबे समय बाद सत्ता में नया नेतृत्व सामने आया है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में टकराव अगर किसी एक चेहरे से पहचाना जाता है, तो वह शुभेंदु अधिकारी हैं। यह वह नेता नहीं हैं जो बयान देकर माहौल संभालते हैं, बल्कि वह हैं जो सीधे मैदान में उतरकर लड़ाई तय करते हैं। नंदीग्राम से निकली उनकी राजनीति ने सिर्फ जमीन का विवाद नहीं बदला, बल्कि सत्ता की दिशा भी मोड़ दी। और फिर वही शुभेंदु, जो कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सिपाही माने जाते थे, 2020 में पाला बदलकर उसी सत्ता के सबसे बड़े चुनौतीकर्ता बन गए।


