Mumbai । भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व फील्डिंग कोच आर. श्रीधर का मानना है कि टीम की फील्डिंग को और बेहतर बनाने के लिए खिलाड़ियों की तैयारी के साथ ही उनके काम करने के तरीके में बदलाव लाना होगा। उन्होंने कहा कि जहां भारतीय टीम ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी में शीर्ष स्तर हासिल किया है। वहीं फील्डिंग के क्षेत्र में वह अभी भी उस स्तर पर नहीं पहुंची है जैसी उससे अपेक्षा है। श्रीधर ने कहा, फील्डिंग में खिलाड़ियों की जवाबदेही बढ़ाने के साथ ही नियमित और केंद्रित अभ्यास तथा प्रदर्शन के स्पष्ट मानक तय करने होंगे।
श्रीधर ने माना है कि पिछले कुछ महीनों में भारतीय टीम की फील्डिंग का स्तर उम्मीद के अनुसार नहीं रहा है। उनके मुताबिक, भले ही हाल ही में टीम ने एक टी20 विश्व कप जीता हो, लेकिन फिर भी मैदान पर कई मौकों पर फील्डिंग में कमियां दिखी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक क्रिकेट, विशेषकर टी20 प्रारूप में, फील्डिंग को बल्लेबाजी और गेंदबाजी जितनी ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए, क्योंकि एक बेहतरीन कैच या सटीक रनआउट मैच का रुख बदल सकता है।
श्रीधर ने कहा कि हाल के टी20 मुकाबलों के दौरान भारतीय टीम ने कुल 58 कैच छोड़े हैं। टीम की कैच पकड़ने की सफलता दर महज 73.4 प्रतिशत रही है, जो शीर्ष 10 टीमों में दूसरे सबसे निचले स्थान पर आती है। इन गंभीर गलतियों का टीम पर सीधा असर पड़ा है। जहां भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी अच्छी फील्डिंग से 129 रन बचाए, वहीं कैच छोड़ने और मैदानी फील्डिंग की गलतियों के कारण 226 अतिरिक्त रन विपक्षी टीम को मिले, जिससे टीम को कुल 97 रनों का नुकसान हुआ।
इसके अतिरिक्त, भारतीय खिलाड़ियों ने 19 रनआउट के सुनहरे अवसर गंवाए, जबकि केवल 14 बार ही विपक्षी बल्लेबाजों को रनआउट किया जा सका।
श्रीधर ने घरेलू क्रिकेट व्यवस्था से भी इस दिशा में गंभीरता से काम करने की अपील की, जिससे टीम में शामिल होने वाले नए खिलाड़ियों को बल्लेबाजी और गेंदबाजी के साथ-फील्डिंग में भी मजबूत बनाया जा सके।
न्यूजीलैंड दौरे को भारतीय खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी चुनौती बताते हुए श्रीधर ने कहा कि वहां का ठंडा मौसम और तेज हवाएं फील्डिंग पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। ऐसे में खिलाड़ियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप खुद को जल्द ढालना होगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आधुनिक क्रिकेट में खिलाड़ियों के प्रदर्शन का आकलन गेंद तक पहुंचने की गति, रिएक्शन टाइम, कैच पकड़ने की सफलता दर और थ्रो की सटीकता जैसे आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए।


