₹25 हजार का इनामी आरोपी पुलिस के शिकंजे में
Kanpur। कानपुर के बहुचर्चित करीब ₹1000 करोड़ के नजूल जमीन घोटाले में लंबे समय से फरार चल रहे ₹25 हजार के इनामी आरोपी को आखिरकार पुलिस ने पंजाब के अमृतसर से गिरफ्तार कर लिया। कोतवाली पुलिस की विशेष टीम ने गैर-राज्य अभियान चलाकर आरोपी को दबोचा और ट्रांजिट रिमांड पर कानपुर लेकर पहुंची।
डीसीपी पूर्वी शिवा सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी रेव दीपक कुमार इस पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। वह सरकारी जमीनों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपये की डील कराने में शामिल था।
पहचान छुपाकर बदल रहा था ठिकाने
पुलिस के मुताबिक, आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और गिरफ्तारी से बचने के लिए पंजाब व हिमाचल प्रदेश में लगातार ठिकाने बदल रहा था। कई बार नोटिस भेजे जाने और गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद वह पुलिस के सामने पेश नहीं हुआ।
इसी बीच कोतवाली पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी अमृतसर के क्विंस रोड स्थित एसएस मोटर इलाके में छिपा हुआ है। इसके बाद पुलिस टीम ने घेराबंदी कर 18 मई को उसे गिरफ्तार कर लिया। स्थानीय अदालत से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद बुधवार को उसे कानपुर लाया गया।
फर्जी दस्तावेजों से हुई ₹250 करोड़ की डील
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने अपने साथी सुनील मसीह के साथ मिलकर सिविल लाइंस इलाके की करोड़ों रुपये मूल्य की नजूल जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे। इसके बाद यह सरकारी जमीन नरेंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह और नागेंद्र सिंह को करीब ₹250 करोड़ में बेच दी गई।
पुलिस के अनुसार, जिस जमीन की डील की गई उसकी वास्तविक बाजार कीमत करीब ₹1000 से ₹1200 करोड़ के बीच आंकी जा रही है।
‘जैकब’ की भूमिका भी जांच के घेरे में
पुलिस का कहना है कि इस पूरी डील में ‘जैकब’ नामक व्यक्ति की भी अहम भूमिका थी। हालांकि प्राथमिकी दर्ज होने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी है। अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
सफेदपोशों और अफसरों की भूमिका खंगालेगी पुलिस
कोतवाली पुलिस अब आरोपी से रिमांड पर पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस घोटाले में भू-माफियाओं के अलावा कौन-कौन सफेदपोश शामिल थे। साथ ही सरकारी विभागों में बैठे किन लोगों ने फर्जी सील-मोहर और दस्तावेज तैयार कराने में मदद की।पुलिस का दावा है कि पूछताछ के बाद इस मामले में कुछ और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है और जल्द ही कई लोगों पर कानूनी शिकंजा कस सकता है।


