दो हफ्ते में रिपोर्ट तलब, बर्खास्त आलोक दुबे की संपत्तियों और नेटवर्क पर फोकस
Kanpur । चर्चित लेखपाल प्रकरण में अब जांच ने निर्णायक मोड़ ले लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए इसकी जांच स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को सौंप दी है। अदालत ने एडीजी STF अमिताभ यश को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद प्रशासनिक और जांच एजेंसियों में हलचल तेज हो गई है। जिला प्रशासन आरोपित से जुड़ी संपत्तियों, बैनामों और वित्तीय दस्तावेजों को तेजी से संकलित कर STF को उपलब्ध करा रहा है। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में कई और प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।
अब तक यह मामला आय से अधिक संपत्ति तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन STF के जुड़ने के बाद जांच का दायरा काफी व्यापक हो गया है। टीम अब जमीन खरीद-बिक्री, बैनामी सौदों, बिल्डरों से संभावित सांठगांठ और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर जैसे पहलुओं की भी गहन जांच करेगी।
गौरतलब है कि मंडलायुक्त के. विजयेंद्र पांडियन पहले ही आलोक दुबे को सेवा से बर्खास्त कर चुके हैं। जांच में सामने आया था कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर करीब 30 करोड़ रुपये की 41 संपत्तियां अर्जित कीं। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण मामलों में परिवार के खातों में एक करोड़ रुपये से अधिक मुआवजा जाने की पुष्टि भी हुई थी।
इस पूरे मामले की शुरुआत अधिवक्ता संदीप सिंह की शिकायत से हुई थी। इसके बाद जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने जांच कराई, जिसमें आरोप सही पाए गए। पहले निलंबन, फिर पदावनति और अंततः बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई।
अब सभी की निगाहें STF की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि यह मामला केवल एक लेखपाल तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क सक्रिय था। मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को प्रस्तावित है।


