Kanpur । जन्म से सुनने और बोलने में असमर्थ बच्चों के लिए सरकारी योजना और आधुनिक चिकित्सा तकनीक मिलकर नई उम्मीद बनकर सामने आई हैं। कलेक्ट्रेट सभागार में सोमवार को आयोजित संवाद कार्यक्रम में कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी से लाभान्वित बच्चों ने अपनी प्रगति से सभी को प्रभावित किया।

अलसमद, आराध्या मिश्रा, ईमान खान, नायमा सिद्दीकी और मोहम्मद उवैस जैसे बच्चे, जो अब तक ध्वनियों की दुनिया से दूर थे, अब धीरे-धीरे सुनने और बोलने की क्षमता विकसित कर रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान जैसे ही बच्चों ने अपने अभिभावकों को “मम्मी-पापा” कहा, पूरा माहौल भावुक हो गया।
मोहम्मद उवैस की माता अलसिफा ने बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण यह इलाज असंभव लगता था, लेकिन सरकार की ओर से प्रति बच्चे छह लाख रुपये की सहायता ने उनके सपने को सच कर दिया। उन्होंने कहा कि अब घर में फिर से बच्चों की आवाज गूंजने लगी है।

नायमा सिद्दीकी की माता सीमा सिद्दीकी ने बताया कि सर्जरी से पहले बच्ची किसी भी बात को समझने में असमर्थ थी, लेकिन अब उसमें लगातार सुधार दिख रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कॉक्लियर इम्प्लांट जन्म से बहरेपन से पीड़ित बच्चों के लिए अत्यंत उपयोगी तकनीक है, जो ध्वनि सुनने और आगे चलकर बोलने की क्षमता विकसित करने में मदद करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र में सर्जरी कराने से परिणाम और बेहतर मिलते हैं।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में बताया गया कि दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की शल्य चिकित्सा योजना के तहत वर्ष 2025-26 में कई बच्चों को इसका लाभ मिला है। सरकार की ओर से प्रति बच्चे छह लाख रुपये का अनुदान मिलने से महंगा उपचार संभव हो सका।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि यह सर्जरी कानपुर के डॉ. एस.एन. मल्होत्रा ईएनटी हॉस्पिटल, अशोक नगर और मरियमपुर हॉस्पिटल, शास्त्री नगर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में की गई। चिकित्सकों ने बताया कि सर्जरी के बाद नियमित स्पीच थेरेपी से बच्चों में लगातार सुधार हो रहा है।अधिकारियों ने निर्देश दिए कि आरबीएसके और आईसीडीएस के माध्यम से ऐसे बच्चों की समय पर पहचान कर उन्हें योजना का लाभ जल्द से जल्द दिलाया जाए, ताकि कोई बच्चा इलाज से वंचित न रहे।


