देशभर की यूनिवर्सिटीज के नाम पर चल रहा था करोड़ों का खेल
Kanpur। कानपुर कमिश्नरेट की किदवई नगर थाना पुलिस और एसआईटी टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए फर्जी मार्कशीट, डिग्री और माइग्रेशन सर्टिफिकेट बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के दो और सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक लैपटॉप और दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
इस कार्रवाई के बाद देशभर की कई यूनिवर्सिटीज और शिक्षा बोर्डों के नाम पर चल रहे बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है।पुलिस के अनुसार, मुखबिर की सूचना पर गौशाला चौराहे के पास स्थित ‘शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन’ कार्यालय में छापेमारी की गई।
जांच में सामने आया कि गिरोह का मुख्य सरगना मनीष कुमार उर्फ रवि, जो हैदराबाद में रह रहा था और मूल रूप से राजस्थान के सीकर का निवासी है, बिना परीक्षा दिलाए हाईस्कूल से लेकर स्नातक, परास्नातक, एलएलबी और फार्मेसी तक की फर्जी डिग्रियां तैयार कराता था। उसके साथ उन्नाव निवासी अर्जुन यादव भी इस नेटवर्क में सक्रिय था।
नकली मोहर और माइग्रेशन सर्टिफिकेट तैयार
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के नाम पर फर्जी माइग्रेशन बुकलेट और डिप्टी रजिस्ट्रार की नकली मोहर तैयार कर चुका था। आरोपियों ने अब तक करीब 80 फर्जी माइग्रेशन सर्टिफिकेट जारी किए थे। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल नौकरी और प्रवेश प्रक्रियाओं में किया जा रहा था।
बैंक खातों में मिले लाखों रुपये
पुलिस को जांच के दौरान मुख्य आरोपी मनीष कुमार के बैंक खाते में 16 लाख 44 हजार 850 रुपये मिले, जिन्हें फ्रीज करा दिया गया है। वहीं सह अभियुक्त अर्जुन यादव के खाते में करीब 20 लाख रुपये जमा होने की पुष्टि हुई है। पुलिस को आशंका है कि गिरोह के जरिए करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ है।
फर्जी अवॉर्ड और नकली डॉक्टरेट का जाल
जांच में खुलासा हुआ कि मनीष कुमार वर्ष 2022 से ‘ग्लोबल बुक ऑफ एक्सीलेंस अवॉर्ड यूके लंदन’ नाम से एक फर्जी संस्था भी चला रहा था। इसके माध्यम से वह नामी हस्तियों और सेलिब्रिटीज को फर्जी अवॉर्ड देकर अपनी पहचान बना रहा था। पुलिस के मुताबिक आरोपी दो बार दुबई की यात्रा भी कर चुका है।
इतना ही नहीं, उसने ‘ग्लोबल ह्यूमन पीस वर्चुअल यूनिवर्सिटी यूएसए चेन्नई’ से फर्जी डॉक्टरेट की उपाधि भी हासिल कर रखी थी, जबकि उसकी शैक्षिक योग्यता केवल 12वीं तक है।
पहले भी कई आरोपी जा चुके हैं जेल
पुलिस ने बताया कि इस मामले में पहले भी कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। इनमें रायबरेली के शैलेंद्र कुमार, प्रयागराज के नागेंद्र मणि त्रिपाठी, नई दिल्ली के जोगेंद्र, उन्नाव के अश्वनी कुमार, नोएडा के विनीत कुमार और चमनगंज निवासी मो. अजहरुद्दीन शामिल हैं।
इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करने में किदवई नगर थाना प्रभारी अनिल कुमार पांडेय, एसआईटी निरीक्षक विजय कुमार, उपनिरीक्षक अखिलेश राव, सचिन सिरोही, हेड कांस्टेबल प्रकाश पाल और चालक धर्मेंद्र कुमार की अहम भूमिका रही। पुलिस कमिश्नर ने टीम की कार्रवाई की सराहना की है।


