Kanpur । साइबर अपराधों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए कमिश्नरेट कानपुर नगर की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने “डिजिटल अरेस्ट” के जरिए लोगों को ठगने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान गिरोह के 5 सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनसे पूछताछ में कई अहम खुलासे सामने आए हैं।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में झारखंड निवासी राजू को गिरोह का मुख्य संचालक बताया जा रहा है, जबकि अन्य आरोपी विभिन्न बैंक खातों के संचालक और सहयोगी भूमिका में शामिल थे।
फर्जी एजेंसियों का डर दिखाकर वसूली
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह खुद को पुलिस, एंटी करप्शन या अन्य जांच एजेंसियों से जुड़ा बताकर लोगों को डराता था। फर्जी “डिजिटल अरेस्ट” का नाटक रचकर पीड़ितों को मानसिक दबाव में लिया जाता था और उन्हें लगातार निगरानी में रखकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था।
पीड़ित को 09 अप्रैल से 21 अप्रैल तक झूठे आरोपों—जैसे आतंकी फंडिंग—में फंसाने का डर दिखाकर लगातार संपर्क में रखा गया और आरटीजीएस के जरिए रकम ट्रांसफर कराई गई।
57 लाख के संदिग्ध ट्रांजेक्शन, रकम फ्रीज
पुलिस जांच में अब तक करीब 57 लाख रुपये के संदिग्ध बैंक ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। इनमें से कुछ धनराशि को फ्रीज कर दिया गया है। साथ ही आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन और एक वाहन बरामद किया गया है।
नेटवर्क 5 राज्यों तक फैला, विदेशी लिंक की जांच
प्रारंभिक जांच में गिरोह का नेटवर्क पांच राज्यों तक फैला हुआ पाया गया है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी आशंका जताई जा रही है, जिसकी जांच की जा रही है।
सीआईएसएफ कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध
पूछताछ के दौरान सीआईएसएफ में तैनात दाउद अंसारी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। उसे आगे की पूछताछ के लिए पुलिस ने हिरासत में लिया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क, फंड ट्रेल और तकनीकी कनेक्शनों की गहन जांच जारी है तथा मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।


