Friday, April 24, 2026
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Lucknow : रश्मिरथी पर्व में गरजे सीएम योगी, बोले– जातिवाद के नाम पर देश को लूटने वालों से रहें सावधान

तीन दिवसीय आयोजन का शुभारंभ, दिनकर की कृति को बताया राष्ट्र चेतना की मशाल

Lucknow । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी कृति ‘रश्मिरथी’ आज भी समाज को दिशा देने वाली प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि भारत को मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित बनाने के लिए जातिवाद के नाम पर समाज को बांटने वाली ताकतों से सतर्क रहना होगा। सीएम शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित तीन दिवसीय ‘रश्मिरथी पर्व’ के शुभारंभ एवं ‘रश्मिरथी से संवाद’ स्मारिका के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

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दिनकर की रचनाएं आज भी प्रासंगिक
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन राष्ट्रकवि दिनकर की 75वीं जयंती के उपलक्ष्य में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दिनकर की रचनाएं सिर्फ साहित्य नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की चेतना हैं। उन्होंने कहा कि “साहित्य समाज का दर्पण होता है” और दिनकर ने इस दर्पण में समाज की सच्चाई को स्पष्ट रूप से दिखाया है।
सीएम ने कहा कि दिनकर की पंक्तियां आज भी प्रेरणा देती हैं— “ऊंच-नीच का भेद न जाने, वही श्रेष्ठ ज्ञानी है…”
उन्होंने जातिवाद पर प्रहार करते हुए दिनकर की पंक्तियां उद्धृत कीं— “जाति-जाति का शोर मचाते केवल कायर क्रूर…

विपत्तियों से न घबराने का संदेश
सीएम योगी ने कहा कि दिनकर ने युवाओं को संघर्ष और धैर्य का संदेश दिया है— “सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है…उन्होंने कहा कि यदि भारत को उसकी शक्ति और गौरव के अनुरूप आगे बढ़ाना है तो समाज में एकता और राष्ट्रभावना को मजबूत करना होगा।

रश्मिरथी’ का मंचन देख भावविभोर हुए सीएम
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान ‘रश्मिरथी’ नाट्य मंचन का अवलोकन किया और कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति की सराहना की। उन्होंने संस्कृति विभाग को निर्देश दिया कि ऐसी कृतियों को अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाया जाए।
विवेकानंद, तिलक और अटल पर भी होंगे कार्यक्रम
सीएम ने बताया कि तीन दिवसीय आयोजन में स्वामी विवेकानंद, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर आधारित विशेष नाट्य प्रस्तुतियां भी होंगी। उन्होंने कहा कि विवेकानंद ने भारत की संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई, वहीं तिलक ने स्वराज का उद्घोष कर स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी।

युवाओं को साहित्य से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा पीढ़ी को साहित्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जोड़ना जरूरी है, क्योंकि यही राष्ट्र निर्माण की नींव रखते हैं। उन्होंने भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय सहित अन्य संस्थानों के छात्रों को कार्यक्रम में शामिल करने के निर्देश दिए।कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे, डॉ. सत्यपाल सिंह, डॉ. दिनेश शर्मा, संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि और साहित्यकार मौजूद रहे।

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