Thursday, June 18, 2026
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kanpur : प्राकृतिक खेती से बदली किसानों की तस्वीर, सीएम योगी ने किया सम्मानित

Kanpur । चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला में उन प्रगतिशील किसानों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सम्मानित किया, जिन्होंने बिना रासायनिक उर्वरकों के खेती कर न केवल बेहतर उत्पादन हासिल किया, बल्कि हजारों किसानों के लिए प्रेरणा भी बने। इन किसानों ने कम लागत, अधिक मुनाफे और पर्यावरण संरक्षण के मॉडल को सफल बनाकर प्राकृतिक खेती की नई पहचान बनाई है।

800 किसानों को जोड़ चुके हैं आशीष

 

बिठूर क्षेत्र के पैगूपुर निवासी आशीष त्रिपाठी पिछले पांच वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत जैविक खेती का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने गेहूं और अरहर जैसी फसलों को प्राकृतिक तरीके से उगाना शुरू किया। जुलाई 2024 में उन्होंने ‘लवकुश फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी’ की स्थापना की और अब तक करीब 800 किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ चुके हैं।

जैविक खाद बनाना सिखा रहे राजेश
शिवराजपुर के मुँहपोछा गांव के राजेश कुमार त्रिपाठी बाजरा और मक्का की प्राकृतिक खेती करते हैं। वे आसपास के चार गांवों के लगभग 150 किसानों को जैविक खाद तैयार करने और प्राकृतिक खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनकी पहल से कई किसान रासायनिक खेती छोड़ प्राकृतिक खेती की ओर बढ़े हैं।

फूल सिंह का स्टार्टअप बना मिसाल
झींझक के जासापुर निवासी फूल सिंह यादव लगभग दो दशक से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। वे सात प्रकार के मोटे अनाज और विभिन्न दालों का उत्पादन बिना किसी रसायन के करते हैं। अपने कृषि उत्पादों के विपणन के लिए उन्होंने स्वयं का स्टार्टअप भी शुरू किया है। अब तक 2000 से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक कर चुके फूल सिंह क्षेत्र में मिसाल बन चुके हैं।

मल्टीलेयर फार्मिंग से बढ़ा मुनाफा
बिल्हौर के भीटी हवेली निवासी सुनील सिंह मल्टीलेयर फार्मिंग के जरिए नई पहचान बना रहे हैं। मचान विधि से सब्जियों की खेती के साथ नीचे हल्दी और गेंदा जैसी फसलें उगाकर वे एक ही खेत से कई गुना उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा वे कई हेक्टेयर क्षेत्र में धान, मक्का और आलू की रसायनमुक्त खेती भी कर रहे हैं।

छोटे लाल का सफल मॉडल
प्राकृतिक खेती अपनाने वाले छोटे लाल ने मात्र दो एकड़ भूमि में लाभदायक खेती का मॉडल तैयार किया है। एक ही खेत में गेहूं, अरहर, परवल, कुंदरू और मूंगफली जैसी कई फसलें उगाकर वे बेहतर आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि जीवामृत और घरेलू संसाधनों से होने वाली यह खेती कम लागत, सुरक्षित उत्पादन और अधिक मुनाफे का भरोसेमंद माध्यम है।
प्राकृतिक खेती के इन सफल उदाहरणों ने साबित कर दिया है कि खेती में नवाचार, स्थानीय संसाधनों का उपयोग और वैज्ञानिक सोच किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा सकती है।

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