रिहाई के दौरान जेल के बाहर धक्का-मुक्की, समर्थकों ने किया हंगामा; पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा
Rampur। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दो पैन कार्ड मामले में सजा निलंबित होने के बाद शनिवार को दोनों जिला जेल से रिहा हुए, लेकिन जेल के मुख्य द्वार से बाहर निकलते ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया। दोनों को गाड़ी में बैठाने के दौरान धक्का-मुक्की हुई। इस बीच आजम खान की ईडी अधिकारियों से बहस भी हुई। घटना के बाद जेल के बाहर मौजूद सपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने हंगामा शुरू कर दिया। भीड़ लगातार बढ़ने पर पुलिस और प्रशासन अलर्ट हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया।
रिहाई के आदेश के बाद जेल से निकले
आजम खान और अब्दुल्ला आजम के अधिवक्ता मोहम्मद जुबैर खान ने शनिवार को दोनों की रिहाई के आदेश जेल प्रशासन को भेजे थे। उन्होंने बताया कि पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद रिहाई की जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई थीं। इसके बाद रामपुर की एमपी-एमएलए अदालत ने दोनों की रिहाई का आदेश जारी किया था। जेल से बाहर आने की सूचना पर बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता और समर्थक जुटे थे। उन्हें उम्मीद थी कि आजम खान और अब्दुल्ला के बाहर आते ही उनका स्वागत किया जाएगा, लेकिन जेल के बाहर ईडी की कार्रवाई से माहौल अचानक बदल गया। दोनों को हिरासत में लेने के दौरान हुई धक्का-मुक्की से समर्थकों में नाराजगी बढ़ गई।
हाईकोर्ट ने निलंबित की थी सात-सात साल की सजा
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति समित गोपाल ने 29 अक्टूबर को आजम खान और अब्दुल्ला आजम की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए उनकी सात-सात साल की सजा निलंबित कर दी थी। हालांकि, अदालत ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। दोनों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, एनआई जाफरी और अधिवक्ता शाश्वत आनंद ने पक्ष रखा था। अदालत ने 15 अक्टूबर को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
दो पैन कार्ड बनवाने के आरोप में दर्ज हुआ था मुकदमा
यह मामला वर्ष 2019 में भाजपा नेता आकाश सक्सेना की शिकायत पर दर्ज कराया गया था। आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने अलग-अलग जन्मतिथियों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवाए और उनका इस्तेमाल किया। मामले में धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए थे। नवंबर 2025 में रामपुर की अदालत ने आजम खान और उनके बेटे को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई थी। इसी सजा के निलंबन के बाद शनिवार को दोनों जेल से बाहर आए थे।

