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उत्तर प्रदेश

Prayagraj : महाकुंभ भगदड़…जांच-पड़ताल में जुटा न्यायिक जांच आयोग

Akash Chaudhary

1500 से अधिक लोग लापता, अपनों की तलाश में भटकते परिवार

Prayagraj। मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर महाकुंभ में उमड़ी भारी भीड़ के कारण मची भगदड़ से कई परिवार बिछड़ गए। इस हादसे में करीब 1500 से अधिक लोग लापता हो गए, जिनमें बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। प्रयागराज के खोया-पाया केंद्रों पर लोग अपने अपनों को खोजने के लिए भटक रहे हैं।

लेकिन अब तक कई परिवारों को कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है। उधर, महाकुंभ में 29 जनवरी को हुई भगदड़ की जांच करने शुक्रवार दोपहर करीब ढाई बजे न्यायिक आयोग की टीम पहुंची। आयोग में रिटायर्ड जज हर्ष कुमार के अलावा पूर्व डीजी वीके गुप्ता और रिटायर्ड आईएएस डीके सिंह शामिल हैं।

सर्किट हाउस में न्यायिक आयोग के तीनों सदस्यों ने बैठक की। इसमें कमिश्नर प्रयागराज जोन विजय विश्वास पंत, मेला अधिकारी विजय किरन आनंद, एडीजी प्रयागराज जोन भानु भास्कर, डीआईजी वैभव कृष्ण के साथ ही पुलिस के अन्य अफसर शामिल हुए। सूत्रों ने बताया कि मेला से जुड़े अधिकारी आयोग के सवालों का सही से जवाब तक नहीं दे पाए।

सभी अधिकारी अपने कामों की वाहवाही करने में ही जुटे थे। इस पर आयोग ने कहा कि अगर सब ठीक था तो भगदड़ कैसे हुई?

प्रशासन की चुप्पी और लापरवाही
प्रयागराज के खोया-पाया केंद्रों में अब तक 1500 से अधिक लोगों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई है। हालांकि, प्रशासन इस बारे में कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी करने से बच रहा है। मेला क्षेत्र में कार्यरत एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सिर्फ 28 और 29 जनवरी के बीच ही 850 से ज्यादा गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई थी।

लेकिन प्रशासन इस पर कोई ठोस जवाब देने के बजाय इसे टाल रहा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि हादसों की सच्चाई और आंकड़े छिपाना एक अपराध है। हजारों करोड़ रुपए प्रचार और दुर्घटना की खबरें दबाने के लिए बहाए जा रहे हैं। लेकिन, पीडि़तों पर कुछ करोड़ खर्च करने से सरकार पीछे क्यों हट रही?

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