भाजपा कार्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान विपक्षी दलों पर जमकर बरसे मुख्यमंत्री
Lucknow । योगी आदित्यनाथ ने संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक पारित न होने पर विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए उसके आचरण को महाभारत के द्रौपदी चीरहरण जैसे प्रसंग से जोड़ दिया। उन्होंने इसे नारी सम्मान के खिलाफ “अक्षम्य पाप” करार देते हुए कहा कि देश की आधी आबादी विपक्ष को कभी माफ नहीं करेगी।
लखनऊ स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी दलों—कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन के अन्य सहयोगियों—ने न केवल विधेयक का विरोध किया, बल्कि उसके गिरने पर जश्न मनाकर अपनी नारी-विरोधी मानसिकता भी उजागर कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि ये दल लगातार देशहित में उठाए गए हर प्रगतिशील कदम के सामने “बैरियर” बनकर खड़े होते रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने नारी सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के जरिए महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रयास किया गया, ताकि उन्हें 2029 तक विधायिका में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल सके। लेकिन विपक्ष ने इसे बाधित करने का काम किया।
सीएम योगी ने विपक्ष पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए शाहबानो प्रकरण और ट्रिपल तलाक कानून का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जो दल आज मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की बात करते हैं, वही पहले उनके अधिकारों के खिलाफ खड़े रहे हैं।
उन्होंने सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना जैसी पहलों ने महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। साथ ही स्वयं सहायता समूहों और ‘लखपति दीदी’ योजना के जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि उसका उद्देश्य केवल परिवारवाद को बढ़ावा देना है, जबकि वर्तमान सरकार “सबका साथ, सबका विकास” के सिद्धांत पर काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए अभूतपूर्व कार्य हुए हैं।
अंत में सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की नारी शक्ति विपक्ष के इस आचरण से आक्रोशित है और एनडीए गठबंधन उनके साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे इस “नारी-विरोधी” मानसिकता को कभी स्वीकार न करें।


