बोले, सपा के समय पेपर बिकते थे और विद्यार्थी उन्हें खरीदकर खेतों तक में बैठकर हल करते थे
कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर का सपा पर निशाना, कहा- परिवारवादी पार्टी ने पिछड़ों का हक छीना, प्रदेश को पीछे ले जाने का किया काम
बोले- योगी सरकार ने नौ लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दीं, एक भी रुपये की रिश्वत नहीं लगी
Lucknow । कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अम्बेडकरनगर में समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि 706 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात देकर सरकार ने अम्बेडकरनगर को विकास की नई रफ्तार दी है। जिले में पांच विधानसभा सीटें हैं और 2027 के चुनाव में सभी पांचों सीटें जीतनी हैं। उन्होंने सपा को परिवारवादी बताते हुए कहा कि उनकी सरकार में नौकरियां बेची जाती थीं और नकल कराई जाती थी, जबकि योगी सरकार ने नौ लाख से अधिक सरकारी नौकरियां रिश्वत के बिना दी हैं।
राजभर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्वागत करते हुए कहा कि वह अम्बेडकरनगर को 706 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात देने आए हैं। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने जिले को विकास के रास्ते पर आगे ले जाने का संकल्प लिया है। विकास के मामले में सरकार ने कोई भेदभाव नहीं किया। उन्होंने कहा कि अब कार्यकर्ताओं को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए जुटना होगा और जिले की सभी सीटों पर जीत का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ना होगा।
राजभर ने पेपर लीक के मुद्दे पर सपा को घेरते हुए कहा कि आज उसके नेता दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश तक पेपर लीक की चर्चा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अपनी सरकार के समय की व्यवस्था भी याद करनी चाहिए।
सपा की सरकार में दूसरे राज्यों से भी विद्यार्थी उत्तर प्रदेश आते थे और नकल के सहारे परीक्षा पास करके चले जाते थे। पेपर बिकते थे और विद्यार्थी उन्हें खरीदकर खेतों तक में बैठकर हल करते थे। कई विद्यार्थी कॉपी और पेपर लेकर घर तक चले जाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के नेता गांव-गांव घूमकर नौकरियां बेचते थे और आज वही लोग पेपर लीक की बात कर रहे हैं।
राजभर ने कहा कि भर्ती कैसे की जाती है, यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीखना चाहिए। योगी सरकार ने नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी और इसके लिए कहीं एक रुपये की भी रिश्वत नहीं देनी पड़ी।
कानून-व्यवस्था पर सपा को घेरा
कानून-व्यवस्था को लेकर भी राजभर ने सपा पर हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि योगी सरकार के नौ वर्षों से अधिक के कार्यकाल में प्रदेश में एक भी दंगा नहीं हुआ, जबकि सपा सरकार के पांच वर्षों में एक हजार दंगे हुए और इनमें 1,200 लोगों की जान गई। राजभर ने कहा कि सपा सरकार के समय अपराधी असलहे लहराते थे और गैंगवार होता था। उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि अपराधी या तो “ऊपर चले गए, नीचे चले गए या जेल के अंदर चले गए।” उन्होंने इसे योगी सरकार की मजबूत कानून-व्यवस्था का परिणाम बताया।
सपा परिवारवादी, पिछड़ों का हक छीनने वाली पार्टी‘
राजभर ने सपा के पीडीए के नारे पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस समय उत्तर प्रदेश में पीडीए की खूब चर्चा की जा रही है, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। उन्होंने सपा को परिवारवादी पार्टी बताते हुए आरोप लगाया कि उसने पिछड़ों का हक छीनने का काम किया है। यह पार्टी प्रदेश और समाज को आगे बढ़ाने के बजाय पीछे ले जाने का काम करती है।
उन्होंने कहा कि सपा की सरकार कई बार बनी, अम्बेडकरनगर की सुध नहीं ली। इसके विपरीत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां आकर विकास परियोजनाओं की बड़ी सौगात दे रहे हैं। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि सीएम योगी ने अम्बेडकरनगर में पुराने इतिहास को बदलकर दिखाया है।
जीरो पॉवर्टी में चिह्नित परिवारों को मिलेगा पक्का आवास
राजभर ने गरीबों के लिए सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर जीरो पॉवर्टी अभियान के तहत गांव-गांव सर्वे कराया गया था। इसमें ऐसे गरीब और कमजोर परिवारों की पहचान की गई, जिनके पास रहने के लिए पक्का मकान नहीं है। सर्वे में 13 लाख से अधिक लोग चिह्नित किए गए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जीरो पॉवर्टी अभियान में चिह्नित पात्र परिवारों को मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने की घोषणा की है।
इलाज के लिए तीन दस्तावेज दें, आर्थिक मदद की प्रक्रिया बढ़ेगी आगे
राजभर ने गंभीर बीमारियों से जूझ रहे गरीब परिवारों के इलाज के लिए मुख्यमंत्री की ओर से दी जा रही आर्थिक सहायता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसी जरूरतमंद को गंभीर बीमारी के इलाज के लिए आर्थिक सहायता चाहिए तो उसे केवल जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। इनमें अस्पताल से इलाज का एस्टीमेट, तहसील से जारी आय प्रमाण पत्र और आधार कार्ड की छायाप्रति शामिल है।
उन्होंने कहा कि इलाज पर पांच लाख, छह लाख, आठ लाख या 10 लाख रुपये का खर्च हो, तो पात्र जरूरतमंद के दस्तावेज मिलने के बाद आर्थिक सहायता की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। उनका प्रयास रहता है कि दस्तावेज उपलब्ध होने के बाद जल्द से जल्द धनराशि संबंधित अस्पताल तक पहुंचे, जिससे पैसे के अभाव में किसी गरीब का इलाज न रुके।


