तीन कर्मचारी निलंबित, जांच कमेटी गठित – स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल
Kanpur । उत्तर भारत के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शुमार हैलट अस्पताल में हुई एक शर्मनाक व हैरान करने वाली घटना ने न सिर्फ चिकित्सा व्यवस्था की सच्चाई उजागर कर दी, बल्कि लोगों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। शनिवार देर रात हुए इस मामले में अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों ने एक जिंदा मरीज को मृत घोषित कर दिया और उस मरीज को ‘शव’ की तरह पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया तक पूरी कर दी।
मिली जानकारी के अनुसार मरीज को गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था।
उपचार के दौरान जूनियर डॉक्टर ने बिना ठीक से जांच किए उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद मृतक के नाम पर पुलिस इंटीमेशन (PI) जारी कर दिया गया और शव को मोर्चरी भेजने की औपचारिकताएँ पूरी करने के आदेश दे दिए गए। यह घटना तब पकड़ में आई जब स्वरूपनगर थाना पुलिस पीआई के तहत बताए गए शव को मोर्चरी में जमा कराने पहुंची। मोर्चरी स्टाफ ने जब मरीज को देखा तो उसकी सांसें चल रही थीं। यह देखकर पुलिस और मोर्चरी कर्मी दंग रह गए।
जिंदा मरीज को ‘शव’ की तरह ले जाने के चलते अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों को जब यह जानकारी मिली तो उन्होंने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। उनकी मांग थी कि जिम्मेदार लोगों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटना फिर न हो।
गलती स्वीकार, सीएमएस ने की पुष्टि
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक सीएमएस डॉ.आर.के. सिंह ने तुरंत मामले की जांच कराई और लापरवाही की पुष्टि की। उन्होंने कहा -यह अत्यंत गंभीर लापरवाही है। जूनियर डॉक्टर ने अपनी गलती स्वीकार की है कि उसने गलत फाइल भर दी और मरीज को मृत मान लिया।हालाँकि, यह सफाई मामले की गंभीरता कम नहीं कर सकी, क्योंकि एक छोटी सी गलती मरीज की जान ले सकती थी।
तीन कर्मचारी निलंबित, जांच कमेटी गठित
कानपुर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने मामले को अमानवीय और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए खतरे की घंटी बताया। उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए-जूनियर डॉक्टर हिमांशु मौर्य,स्टाफ नर्स सन्नी सोनकर,वार्ड आया रहनुमा,को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।साथ ही घटना की गहराई तक जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बना दी गई है।इस कमेटी की अगुवाई उप-प्राचार्य डॉ. रिचा गिरि करेंगी और इसे 48 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
मरीज और परिजनों की जान पर खेल
यदि समय रहते मोर्चरी में सांसें चलती न दिखाई देतीं तो यह लापरवाही मरीज की असली मौत का कारण बन सकती थी। परिजनों का कहना है कि हैलट में इलाज कराने लाए और डॉक्टरों ने मौत सौंप दी। यह हत्या के बराबर है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह
यह घटना बताती है कि -मरीज की प्राथमिक जांच तक सही तरीके से नहीं हो रही मॉनिटरिंग सिस्टम और डॉक्टरों की जिम्मेदारी पर बड़ा संकट आम मरीजों की जिंदगी भरोसे पर छोड़ दी गई है।लोगों के बीच यह तर्क गूंज रहा है कि जब प्रदेश के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान में ऐसी घटना हो सकती है, तो अन्य अस्पतालों में हालात कितने भयावह होंगे।अस्पताल प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही मरीज की हालत पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।


