Wednesday, January 21, 2026
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Munbai : महाभारत के ‘कर्ण’ पंकज धीर का निधन

68 वर्ष की उम्र में कैंसर से हारी जिंदगी, टीवी इंडस्ट्री और फैंस में शोक की लहर

मुंबई, 15 अक्टूबर । दूरदर्शन के ऐतिहासिक धारावाहिक ‘महाभारत’ में ‘कर्ण’ का यादगार किरदार निभाने वाले वरिष्ठ अभिनेता पंकज धीर का 14 अक्टूबर की रात निधन हो गया। वे 68 वर्ष के थे और लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। उनकी तबीयत पिछले कुछ महीनों से बिगड़ती जा रही थी। देर रात उनकी हालत अचानक बिगड़ी और उन्होंने मुंबई स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली।

उनका अंतिम संस्कार 15 अक्टूबर को विले पार्ले स्थित पवनहंस श्मशान घाट पर किया गया, जहां उनके परिवारजन, करीबी मित्र और टीवी-फिल्म इंडस्ट्री के कई नामचीन चेहरे मौजूद रहे। उनके बेटे और अभिनेता निकितिन धीर ने नम आंखों से पिता को अंतिम विदाई दी।

संघर्ष से पहचान तक: एक प्रेरणादायक यात्रा

1983 में फिल्म ‘सूर्यकांत’ से अपने करियर की शुरुआत करने वाले पंकज धीर को असली पहचान 1988 में आए बी. आर. चोपड़ा के धारावाहिक ‘महाभारत’ से मिली, जिसमें उन्होंने कर्ण की भूमिका निभाई। उनके अभिनय में जो गंभीरता और गहराई थी।, उसने उन्हें दर्शकों के दिलों में अमर कर दिया।इसके बाद उन्होंने चंद्रकांता, युग, बेताल पचीसी, देत-देवता, सिया के राम जैसे कई चर्चित टीवी शोज़ में काम किया और अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।

 

परिवार में भी बसी है अभिनय की विरासत

पंकज धीर के परिवार का भी टीवी और फिल्मों से गहरा नाता है। उनकी पत्नी अनिता धीर एक प्रसिद्ध टीवी अभिनेत्री हैं। बेटा निकितिन धीर बॉलीवुड में सक्रिय हैं और चेन्नई एक्सप्रेस में विलेन ‘टंगबली’ की भूमिका से चर्चा में आए थे। उनकी बहू कृतिका सेंगर भी एक लोकप्रिय टीवी अभिनेत्री हैं।

एक्टर से डायरेक्टर तक: अभिनय को दी नई दिशा

पंकज धीर न केवल एक अभिनेता थे, बल्कि लेखक और निर्देशक भी रहे। उन्होंने कई शॉर्ट फिल्म्स और म्यूजिक वीडियोज़ का निर्देशन किया और ‘Abbhinnay Acting Academy’ के ज़रिए युवा कलाकारों को अभिनय की बारीकियाँ सिखाईं। वे हमेशा कहते थे।“अभिनय वही जो दिल से किया जाए, न कि केवल कैमरे के लिए।

 

कर्ण’ की तरह जीवन और वैसी ही विदाई

पंकज धीर की ज़िंदगी संघर्षों से भरी रही, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। वे कहते थे।कलाकार का असली पुरस्कार दर्शकों की आंखों के नम होने में है, तालियों में नहीं।उनका जाना एक अपूरणीय क्षति है। अभिनय के प्रति उनका समर्पण, व्यक्तित्व में विनम्रता और मंच पर गहराई – इन्हें भुला पाना मुश्किल है।

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