Monday, May 18, 2026
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Lucknow : नमाज पढ़नी है तो शिफ्ट में पढ़िए, लेकिन सड़क पर नहीं: मुख्यमंत्री

 

सीएम की दो टूक- सड़कों पर अव्यवस्था व अराजकता किसी कीमत पर स्वीकार नहीं, प्यार से माने तो ठीक नहीं तो दूसरा तरीका अपनाएंगे

पिछली सरकारों में कट्टा-बम का प्रोडक्शन होता था, हम बनाते हैं ब्रह्मोस मिसाइल: सीएम योगी

अमर उजाला’ के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित संवाद कार्यक्रम को संबोधित किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने

Lucknow ।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की बदली तस्वीर का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछली सरकारों में यह राज्य कट्टा-बम, दंगे और माफिया संस्कृति के लिए जाना जाता था, जबकि आज यूपी की पहचान ब्रह्मोस मिसाइल, डिफेंस कॉरिडोर, एक्सप्रेस-वे, इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स और निवेश डेस्टिनेशन के रूप में है। कानून व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और सकारात्मक शासन की बदौलत प्रदेश बॉटम-2 से निकलकर टॉप-2 राज्यों में पहुंचा है। राज्य में अराजकता व अव्यवस्था पर जीरो टॉलरेंस है। राह चलती बेटी से छेड़खानी करने वाले की रावण व दुर्योधन जैसी दुर्गति होगी।

सड़क पर नमाज पढ़ने के मुद्दे पर उन्होंने दो टूक कहा कि नमाज पढ़नी है तो शिफ्ट में पढ़िए, हम रोकेंगे नहीं, लेकिन सड़क पर इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। मौजूदा दौर में पत्रकारिता पर अपने विचार रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सनसनी व फेक न्यूज समाज में अराजकता फैलाती हैं, जबकि सकारात्मक और संवेदनशील पत्रकारिता लोकतंत्र को मजबूत करती है। सीएम योगी सोमवार को ‘अमर उजाला’ के 78वें स्थापना दिवस पर आयोजित संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

सीएम योगी ने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र ने हिंदी पत्रकारिता को नई ऊंचाई दी थी। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की लेखनी ने आजादी को नई दिशा दी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने पत्रकारिता को आंदोलन का आधार बनाया। कानपुर में गणेश शंकर विद्यार्थी ने पत्रकारिता को देश की स्वाधीनता और सामाजिक न्याय का आधार बनाने का कार्य किया। 1975 में जब लोकतंत्र का गला घोंटने का प्रयास हुआ, तब मूर्धन्य संपादकों व रिपोर्टरों ने इसे नाकाम कर दिया। लोकतंत्र में केवल विधायिका, न्यायपालिका या कार्यपालिका ही नहीं, मीडिया की भी सशक्त भूमिका है। लेकिन, डीप-फेक या फेक-न्यूज का खतरा हर जगह मंडरा रहा है।

फेक-न्यूज पर कठघरे में खड़े होना पड़ता है
सीएम ने कहा कि रिपोर्टिंग को सनसनी पैदा करने का आधार बनाने की बजाय संवेदनशील बनाया जाता तो बहुत सारी जगहों पर लॉ एंड ऑर्डर की समस्या नहीं खड़ी होती। सनसनी फैलाने वाली न्यूज से रिपोर्टर, समाचार पत्र या मीडिया ग्रुप को तात्कालिक लाभ हो सकता है, लेकिन जब वही न्यूज फेक निकलती है, तो कठघरे में भी खड़ा होना पड़ता है।

हम लोग उसके लिए अलर्ट भी रहते हैं, क्योंकि किसी गलत खबर से एक बार आग लग गई तो फिर उसे बुझाने में समय लगता है। हम नहीं चाहते कि यूपी में फिर से दंगे-कर्फ्यू का माहौल बने। यूपी में किसी को अराजकता फैलाने की छूट नहीं है।

लोग पूछते हैं कि यूपी में सचमुच सड़कों पर नमाज नहीं होती?
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग पूछते हैं कि आपके यहां यूपी में क्या सड़कों पर सचमुच नमाज नहीं होती? मैं कहता हूं कि कतई नहीं होती है। आप जाकर देख लो, नहीं होती है। सड़कें चलने के लिए हैं या कोई भी व्यक्ति चौराहे पर आकर तमाशा बना देगा? क्या अधिकार है उसको सड़क रोकने का, आवागमन बाधित करने का? जहां इसका स्थल है, वहां जाकर पढ़ो। लोगों ने मुझसे कहा, कैसे होगा, हमारी संख्या ज्यादा है? हमने कहा, शिफ्ट में कर लो।

घर में रहने की जगह नहीं है, तो संख्या नियंत्रित कर लो। और, सामर्थ्य नहीं है तो क्यों संख्या बढ़ाए जा रहे? आपको सिस्टम के साथ रहना है, तो नियम-कानून मानना शुरू करें। नमाज पढ़नी है, आप शिफ्ट में पढ़िए। हम रोकेंगे नहीं, लेकिन सड़क पर नहीं। सामान्य नागरिक, बीमार व्यक्ति, कामगार, कर्मचारी सभी सड़कों पर चलते हैं, हम सड़क बाधित नहीं करने देंगे। प्यार से मानेंगे तो ठीक बात है, नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे। संवाद से मानेंगे तो ठीक नहीं तो संघर्ष से भी देख लें। बरेली में लोगों ने हाथ आजमाने का कार्य किया, देख ली सरकार की ताकत। सरकार हर सिस्टम के साथ पूरी व्यवस्था को जोड़ना चाहती है।

ट्रेड यूनियन नेता सांसद, मंत्री बन गए, श्रमिक भुखमरी के कगार पर पहुंच गया
सीएम ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्र का व्यक्ति, अलग-अलग क्षेत्र में कार्य करता है, लेकिन कभी-कभी उसके स्वर ट्रेड यूनियन जैसे हो जाते हैं। ट्रेड यूनियन की प्रवृत्ति कभी सकारात्मक नहीं रही। इसने सत्यानाश ही किया है। ये चंदा वसूली और ‘अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम’ की तर्ज पर पूरी व्यवस्था को खोखला बनाने का काम करती हैं। ट्रेड यूनियन के नेता कोई काम नहीं करते, कंधे पर झोला लटकाए घूम-घूम कर डिस्टरबेंस फैलाते हैं।

चंदा वसूली से अपना घर भरते हैं और श्रमिकों को भुखमरी के कगार पर लाकर खड़ा कर देते हैं। कानपुर इसका स्पष्ट उदाहरण है। ट्रेड यूनियन के नेता सांसद व मंत्री बन गए, लेकिन श्रमिक भुखमरी के कगार पर पहुंच गया।

कभी शिक्षक, चिकित्सक, व्यापारी भरते थे गुंडा टैक्स
सीएम योगी ने कहा कि 9 वर्ष पहले मैं नहीं समझ पाया कि मुझे यूपी क्यों भेजा जा रहा है क्योंकि मैं एक सांसद था। मैंने तो एमएलए का चुनाव भी नहीं लड़ा था। लेकिन मैं यूपी की समस्या जानता था, यहां हर दूसरे दिन दंगे होते हैं। हर जिले में सत्ता का समानांतर माफिया सत्ता संचालित होती है। शिक्षक, चिकित्सक या व्यापारी, सब गुंडा टैक्स देने के लिए मजबूर थे।

बेटी सुरक्षित नहीं थी। न इंफ्रास्ट्रक्चर था। सड़कों पर गड्ढे या अंधेरा दिखाई देते ही यात्री मान लेते थे कि यूपी में प्रवेश कर चुके हैं। सरकार बनाने के बाद हमने कानून का राज स्थापित किया। आज राह चलती बेटी के साथ छेड़खानी करने वाले की दुर्गति रावण व दुर्योधन जैसी होना तय है।

विकास की महागाथा रची उत्तर प्रदेश ने
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में जितने भी एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, उनमें से 60 प्रतिशत एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश में बने हैं। इंटरस्टेट कनेक्टिविटी अब चार लेन की हो गई है। सभी सीमाओं पर सरकार ने भारत-नेपाल मैत्री द्वार, उत्तर प्रदेश-बिहार मैत्री द्वार, उत्तर प्रदेश-झारखंड मैत्री द्वार आदि बनाए हैं। राज्य में 16 एयरपोर्ट संचालित हैं, पांच पर कार्य चल रहा है और पांच इंटरनेशनल एयरपोर्ट शुरू हो चुके हैं। भारत के सबसे बड़े नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की डोमेस्टिक सेवाएं 15 जून से शुरू हो रही हैं।

देश का सबसे लंबा गंगा एक्सप्रेसवे हाल ही में पीएम मोदी जी द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया है। हमने प्रदेश को बीमारू राज्यों की श्रेणी में निकाल कर रेवेन्यू सरप्लास स्टेट बनाया है। अर्थव्यवस्था को तीन गुना करने में सफलता प्राप्त की है। प्रदेश की कुल जीएसडीपी जो 12 लाख करोड़ रुपये थी, वह आज बढ़कर 36 लाख करोड़ रुपये हो गई है। प्रति व्यक्ति आय 43 हजार रुपये से बढ़कर 1 लाख 20 हजार रुपये को पार कर चुकी है। इसी तरह हमने प्रदेश के बजट के आकार को भी तीन गुना करने में सफलता हासिल की है।

9 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दीं। आज उत्तर प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई यूनिट्स संचालित हैं, जिनसे 3 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है।

सीएम योगी ने कहा कि आज यूपी के पास 34 सेक्टरल पॉलिसी हैं, जो देश में सबसे अधिक हैं। पॉलिसी पैरालिसिस पूरी तरह समाप्त हो चुका है। सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म, निवेश सारथी और निवेश मित्र जैसी पहलों के माध्यम से निवेशकों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा रहा है। इन प्रयासों का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं, जिनमें से 15 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है और साढ़े सात लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं।

महिला वर्कफोर्स 12-13 फीसदी से बढ़कर 36 फीसदी से ऊपर पहुंचा है। पहले महिलाएं दिन में भी कार्य करने के लिए जाने से डरती थीं, स्कूल जाने से डरती थीं, आज वे रात्रि की शिफ्ट में भी कार्य कर रही हैं और सकुशल घर वापस आती हैं। यह नए यूपी की यह पहचान है।

पहचान का संकट खड़ा किया गया यूपी के सामने
सीएम योगी ने कहा कि राजनीति, जातिवाद, परिवारवाद, भेदभावकारी राजनीति ने उत्तर प्रदेश को बीमारू बनाया था। इसने यूपी के नौजवानों के सामने पहचान का संकट खड़ा किया था, जबकि यूपी के अंदर अपार संभावनाएं पहले भी थीं। हमारे पास 86 प्रतिशत से ज्यादा सिंचित भूमि है। विकसित देशों में भी यह प्रतिशत 15 से 20 फीसदी से अधिक नहीं है। हमारा अन्नदाता किसान आज पूरी दुनिया का पेट भरने का अन्न उत्पादन कर सकता है। कृषि विकास दर 8 फीसदी से बढ़कर 18 फीसदी तक पहुंची है। वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट स्कीम यूपी की पहचान हो चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 9 साल पहले एमएसएमई क्षेत्र मृतप्राय हो चुका थी। यह केवल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, पुलिस और अलग-अलग विभागों के लिए शोषण का जरिया बन चुका था। कामगार निराश था, किसान आत्महत्या और युवा पलायन के लिए मजबूर था। नए यूपी में नौजवान अपने ही जनपद और अपने ही गांव में रोजगार प्राप्त कर रहा है।

कट्टा-बम की जगह ब्रह्मोस को बनाया पहचान
सीएम योगी ने कहा कि पिछली सरकारों में क्या होता था? उनका प्रोडक्शन क्या था- कट्टा-बम। हमने इसे बंद करवाया, अब यहां ब्रह्मोस मिसाइल बन रही है। ड्रोन बन रहे हैं। हर फील्ड में काम हो रहा है। जब हमने निवेश का माहौल बनाया तो सोचा कि 15 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव आएंगे, लेकिन हमारे पास 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव आ चुके हैं।

 

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