खाद्य सुरक्षा मानकों के निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों के बाद विभाग ने जारी किए विस्तृत निर्देश
स्वस्थता प्रमाण-पत्र, पानी की जांच रिपोर्ट, पेस्ट कंट्रोल प्रमाण-पत्र और कच्चे माल के बिल रखना होगा अनिवार्य
मेन्यू कार्ड पर एलर्जन, कृत्रिम रंग, कृत्रिम स्वीटनर और कुकिंग माध्यम की देनी होगी जानकारी
10 या अधिक आउटलेट अथवा केंद्रीय लाइसेंस वाले प्रतिष्ठानों को प्रति सर्विंग कैलोरी और सर्विंग साइज भी बताना होगा
Lucknow । खाद्य प्रतिष्ठानों में खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रभावी अनुपालन और उपभोक्ताओं को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। विभाग द्वारा विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों के फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड के निरीक्षण के लिए चलाए गए विशेष अभियानों के दौरान कई इकाइयों में आवश्यक प्रमाण-पत्र और उपभोक्ताओं की जानकारी से जुड़े कुछ प्रावधानों का अनुपालन नहीं पाया गया। खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से व्यापक जनहित में विभाग ने संबंधित खाद्य कारोबारकर्ताओं को इन सभी बिंदुओं का तत्काल प्रभाव से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि विभाग के द्वारा पूरे प्रदेश में “शुद्ध ही शुभ है” अभियान चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्रदेश में सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सुनिश्चित करना है। इसके तहत खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता, सुरक्षित भंडारण, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन की जांच कर खाद्य कारोबारियों को सुधार का अवसर दिया जा रहा है।
निरीक्षण के समय सात अभिलेख रखना जरूरी
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त रोशन जैकब के निर्देश के अनुसार खाद्य प्रतिष्ठान में निरीक्षण के दौरान खाद्य लाइसेंस अथवा पंजीकरण उपलब्ध होना अनिवार्य है। इसके अलावा प्रतिष्ठान में कार्यरत कार्मिकों के स्वस्थता प्रमाण-पत्र भी रखने होंगे। प्रतिष्ठान में इस्तेमाल होने वाले पानी की आईएस 10500 मानक के अनुसार अर्द्धवार्षिक जांच रिपोर्ट भी उपलब्ध होनी चाहिए।
इसी तरह पेस्ट कंट्रोल प्रमाण-पत्र, कच्चे माल की खरीद से संबंधित बिल, भंडारण कक्ष का स्टॉक रजिस्टर और प्रतिष्ठान की साफ-सफाई से संबंधित शिड्यूल एवं उसके रिकॉर्ड भी निरीक्षण के समय प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
एमएसजी के इस्तेमाल की भी देनी होगी जानकारी
खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल किए जाने वाले सहयोज्य (एडिटिव) के संबंध में भी उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी देनी होगी। यदि किसी खाद्य पदार्थ में मोनोसोडियम ग्लूटामेट-एमएसजी (अजीनोमोटो) का प्रयोग किया जाता है तो पैकेज अथवा मेन्यू कार्ड पर यह घोषणा करनी होगी कि 12 माह से कम आयु के शिशुओं और गर्भवती महिलाओं के लिए एमएसजी का सेवन अनुशंसित नहीं है।
इसके साथ ही खाद्य पदार्थ में इस्तेमाल किए गए आर्टिफिशियल स्वीटनर के प्रकार और आर्टिफिशियल कलर के नाम की घोषणा भी पैकेज अथवा मेन्यू कार्ड पर करनी होगी।
मेन्यू कार्ड पर एलर्जन की जानकारी जरूरी
खाद्य प्रतिष्ठानों को अपने मेन्यू कार्ड पर एलर्जन संबंधी सूचना भी उपलब्ध करानी होगी, ताकि उपभोक्ता किसी खाद्य पदार्थ के सेवन से पहले उसमें मौजूद संभावित एलर्जन के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।
बड़े प्रतिष्ठानों को बतानी होगी कैलोरी
जिन खाद्य प्रतिष्ठानों के पास केंद्रीय लाइसेंस है अथवा जिनके 10 या उससे अधिक आउटलेट हैं, उनके लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है। ऐसे प्रतिष्ठानों को मेन्यू कार्ड, बोर्ड अथवा बुकलेट में प्रदर्शित खाद्य पदार्थों के संबंध में कैलोरीफिक वैल्यू यानी प्रति सर्विंग कितनी किलो कैलोरी है, इसकी जानकारी देनी होगी। साथ ही सर्विंग साइज भी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना होगा।
एल्युमिनियम फॉयल भी होना चाहिए फूड ग्रेड
विभाग ने तैयार खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली एल्युमिनियम फॉयल को लेकर भी निर्देश दिए हैं। प्रिपेयर्ड फूड की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली एल्युमिनियम फॉयल पैकेजिंग विनियम, 2018 में निर्धारित मानकों के अनुरूप और फूड ग्रेड होनी चाहिए।
कुकिंग माध्यम की जानकारी भी देनी होगी
खाद्य प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थ तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कुकिंग मीडियम का उल्लेख भी अनिवार्य किया गया है। इसकी जानकारी मेन्यू कार्ड अथवा प्रतिष्ठान के सहज दृश्य स्थान पर प्रदर्शित करनी होगी, ताकि उपभोक्ता को खाद्य पदार्थ तैयार करने में इस्तेमाल किए जाने वाले माध्यम की जानकारी आसानी से मिल सके।
रेडी-टू-कुक खाद्य सामग्री पर भी पूरी जानकारी जरूरी
विभाग ने प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाली सेमी-कुक्ड अथवा रेडी-टू-कुक पैक्ड सामग्री के संबंध में भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। ऐसी सामग्री के पैकेज पर उसके अवयव (इंग्रीडिएंट्स) और भंडारण की स्थितियां (स्टोरेज कंडीशंस) अनिवार्य रूप से अंकित होनी चाहिए।
साथ ही खाद्य कारोबारकर्ताओं को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी सामग्री को विनिर्माण इकाई से गोदाम तक ले जाने के दौरान निर्धारित भंडारण शर्तों का पूरा पालन किया जा रहा हो। यानी परिवहन के दौरान भी खाद्य पदार्थ की निर्धारित स्टोरेज कंडीशन बनाए रखना अनिवार्य होगा।
एक नवंबर से प्रवर्तन कार्रवाई में होगी अनुपालन की जांच
विभाग ने इन सभी निर्देशों का तत्काल प्रभाव से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 1 नवंबर 2026 से विभागीय प्रवर्तन एवं निरीक्षण कार्रवाई के दौरान उपरोक्त सभी बिंदुओं के अनुपालन को संज्ञान में लिया जाएगा। ऐसे में खाद्य कारोबारकर्ताओं को निर्धारित अभिलेख, प्रमाण-पत्र और उपभोक्ता सूचना संबंधी सभी प्रावधानों को समय से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
उपभोक्ता हित में पारदर्शिता पर जोर
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के बाद विभाग का फोकस अब सर्विस सेक्टर पर है। विभाग के इस निर्देश का प्रमुख उद्देश्य खाद्य प्रतिष्ठानों में खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन के साथ-साथ उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थों से जुड़ी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना है। लाइसेंस और जांच रिपोर्ट जैसे अनिवार्य अभिलेखों से लेकर एलर्जन, एडिटिव, कैलोरी, कुकिंग मीडियम और पैकेजिंग से जुड़ी जानकारी तक को व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है, ताकि खाद्य कारोबार में सुरक्षा, स्वच्छता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।


