Kanpur ।प्राचीन महाराज प्रयाग नारायण मंदिर शिवाला में “बैकुंठ उत्सव” मनाया गया यह ५ दिवसीय उत्सव प्रतिवर्ष पॏष शुक्ल पक्ष की एकादशी से पूर्णमासी तिथि तक मनाया जाता है ।प्रथम दिन उत्सव का मुख्य आकर्षण संस्कृति एवं तमिल भाषा में विशेष मंत्र उच्चारण के साथ एकादशी को प्रातः १०:३० बजे “बैकुंठ द्वार” (एक विशेष द्वारा) खोला गया यह दरवाजा जो कि प्रतिवर्ष एकादशी से पूर्णमासी तिथि तक आम भक्तों हेतु खुला रहता है ।

असंख्यभक्तगढ़ भगवान श्रीबैकुंठनाथ (लक्ष्मी नारायण भगवान )के भव्य स्वर्ण सिंहासन को कंधे पर रखकर इसी बैकुंठ द्वार से बाहर आए साथ में दक्षिण भारत के चार आचार्य (अलवार) के रजत सिंहासन भी रहे ।यह स्वर्ण सिंहासन शिवाला मंदिर के प्रांगण में भक्तों के कंधों में विराजमान होकर परिक्रमा हुई परंपरागत विशेष निर्मित अंग वस्त्र एवं विशेष निर्मित पेड़ा प्रसाद वितरण किया गया यह महोत्सव आम जनमानस में बड़े पेड़ा वाला उत्सव के नाम से चर्चित है ।
उत्तर भारत में वृंदावन अयोध्या के अतिरिक्त भक्ति एवं आस्था का यह स्वरूप केवल कानपुर में इसी स्थान (मंदिर) में देखने को मिलता है । आम जनता (भक्तों) ने इस अवसर पर आज दिनभर बैकुंठ द्वार से अंदर जाकर एवं लौटकर अपनी आस्था प्रकट की ।यह विशेष बैकुंठ द्वारा आगामी ५ दिन तक खुला रहेगा उत्सव मंदिर के युवा प्रबंधक अभिनव नारायण तिवारी एवं अध्यक्ष विजय नारायण तिवारी “मुकुल” तथा राघव नारायण तिवारी के नेतृत्व में संपन्न हुआ ।
यह उत्सव में वृंदावन नैमिषारण एवं प्रयागराज अयोध्या आदि के अनेक भक्त एवं आचार्य ने भाग लिया ।प्रमुख रूप से अनिल कुमार शर्मा, मनोज तिवारी सेंगर, अमित बाजपेई, प्रदीप दीक्षित, राजीव तिवारी ,धर्म प्रकाश गुप्त ,महेश मिश्रा, अजय कुमार, राजेश मिश्रा ,डॉ पवन कुमार तिवारी, प्रसिद्ध ध्रुपद संगीतकार विनोद द्विवेदी उमंग अग्रवाल बृजेश अवस्थी करुणेश दीक्षित डॉ राम दीक्षित मौजूद रहे।


