कानपुर के गांव में उलटे रिश्तों की कहानी, प्रशासन की पहल पर सुलझा विवाद
Kanpur । जनतादर्शन में आमतौर पर जमीन-जायदाद या सरकारी योजनाओं से जुड़ी शिकायतें आती हैं, लेकिन इस बार एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सभी को चौंका दिया। एक बुजुर्ग मां अपनी ही बेटी से परेशान होकर जिलाधिकारी के पास पहुंची और उससे छुटकारा दिलाने की गुहार लगा दी।

तहसील सदर के ग्राम दूल की 76 वर्षीय सरस्वती ने जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के सामने अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी प्रेमशान्ती, जिसे उन्होंने सहारा देकर अपने घर में रखा, अब उनके लिए ही परेशानी बन गई है। आरोप है कि बेटी आए दिन झगड़ा करती है और हाल ही में उन्हें घर से बाहर निकाल दिया।
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल जांच के निर्देश दिए। इसके बाद उपजिलाधिकारी सदर अनुभव सिंह राजस्व और पुलिस टीम के साथ गांव पहुंचे। प्रशासनिक टीम को देखकर गांव में हलचल मच गई और देखते ही देखते ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।
जांच के दौरान सामने आया कि मां-बेटी के बीच लंबे समय से मनमुटाव चल रहा है।
वहीं, बेटी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह ससुराल में प्रताड़ना के चलते मायके में रह रही है और उस पर लगाए गए आरोप गलत हैं। उसने भरोसा दिलाया कि बेटी की शादी के बाद वह ससुराल लौट जाएगी।
गांव में ही दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर ‘घर की पंचायत’ कराई गई। काफी देर तक चली बातचीत के बाद माहौल शांत हुआ और अस्थायी समझौता हो गया।
उपजिलाधिकारी ने दोनों को समझाकर विवाद खत्म कराया और स्थानीय अधिकारियों को निगरानी के निर्देश दिए।इस अनोखे मामले ने यह साफ कर दिया कि बदलते सामाजिक परिवेश में अब रिश्तों की परिभाषा भी बदल रही है। कभी सहारा बनी संतान ही जब विवाद की वजह बन जाए, तो समाधान के लिए प्रशासन और समाज—दोनों को आगे आना पड़ता है।


