12वीं पास आरोपी फर्जी डॉक्टर बनकर चला रहा था अवैध नेटवर्क, 30 से अधिक ट्रांसप्लांट का खुलासा
Kanpur । रावतपुर थाना पुलिस ने लंबे समय से सक्रिय अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के मास्टरमाइंड रोहित तिवारी को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था। गिरफ्तारी के बाद इस पूरे गिरोह के अंतरराज्यीय नेटवर्क को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं।
फर्जी डॉक्टर बनकर रचता था पूरा खेल
पुलिस जांच में सामने आया है कि मूल रूप से हरदोई के बिलग्राम निवासी रोहित तिवारी केवल 12वीं पास है, लेकिन वह खुद को डॉक्टर बताकर लंबे समय से किडनी डोनर और रिसीपिएंट के बीच अवैध सौदों का नेटवर्क चला रहा था। वह निजी अस्पतालों में सेटिंग कर ट्रांसप्लांट ऑपरेशन तक कराता था और इसके बदले मोटी रकम वसूलता था।
मेरठ कनेक्शन से जुड़ा संगठित गिरोह
पूछताछ में आरोपी ने मेरठ के एक संगठित गिरोह से अपने संपर्क का खुलासा किया है, जिसमें रोहित मुदगल, डॉक्टर अली और अफजल जैसे लोग शामिल बताए जा रहे हैं। यह नेटवर्क कानपुर और आसपास के जिलों के निजी अस्पतालों में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कराता था और पूरे सौदे को गुप्त तरीके से अंजाम देता था।
30 से अधिक अवैध ट्रांसप्लांट कराने की बात स्वीकार
रोहित तिवारी ने पुलिस पूछताछ में स्वीकार किया है कि वह अब तक 30 से अधिक अवैध किडनी ट्रांसप्लांट करा चुका है। इस पूरे रैकेट में उसका मुख्य सहयोगी शिवम अग्रवाल बताया जा रहा है, जो मरीजों, डोनर और अस्पतालों के बीच समन्वय का काम करता था।
मोबाइल बरामद न होने से जांच में अहम सुराग
पुलिस के अनुसार आरोपी का मोबाइल फोन अभी तक बरामद नहीं हुआ है, जिसे इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में बेहद अहम माना जा रहा है। आशंका है कि मोबाइल में कई डोनर, रिसीपिएंट और अस्पतालों से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा मौजूद हो सकते हैं, जिससे पूरे गिरोह का खुलासा हो सकता है।
फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें सक्रिय
पुलिस ने बताया कि मेरठ और अन्य जिलों से जुड़े फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की गई हैं। पुलिस अब पूरे रैकेट की वित्तीय और मेडिकल कड़ियों की भी जांच कर रही है।पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) एस.एम. कासिम आबिदी ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ के आधार पर पूरे गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश तेज कर दी गई है।


