Kanpur । नगर निगम में दो पार्षदों के निलंबन के बाद उपजा राजनीतिक घमासान अब बड़े शक्ति प्रदर्शन में तब्दील हो गया है। महापौर के खिलाफ बागी तेवर अपनाने वाले पार्षदों द्वारा 60 से अधिक पार्षदों के समर्थन का दावा किए जाने के बीच महापौर ने अपनी सियासी मजबूती सार्वजनिक रूप से दिखा दी।
प्रमिला सभागार में आयोजित अहम बैठक में 83 पार्षदों की मौजूदगी ने न केवल बागी खेमे के दावों की हवा निकाल दी, बल्कि निगम की राजनीति की दिशा भी साफ कर दी।पिछले सदन में महापौर द्वारा दो पार्षदों को निलंबित किए जाने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी।
निलंबित पार्षदों ने महापौर के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलते हुए बगावती तेवर अपनाए और दावा किया कि उनके साथ 60 से अधिक पार्षद खड़े हैं। उनके सुर में चार अन्य पार्षद भी शामिल हो गए। बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के चलते कड़ाके की ठंड में भी नगर निगम का माहौल गर्म हो गया और निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।
इसी राजनीतिक अस्थिरता के बीच महापौर ने प्रमिला सभागार में विकास कार्यों की समीक्षा को लेकर पार्षदों की बैठक बुलाई। बैठक में शहर के विभिन्न वार्डों से आए 83 पार्षदों ने शिरकत की। बड़ी संख्या में पार्षदों की उपस्थिति को महापौर की सियासी ताकत के रूप में देखा जा रहा है। बैठक के दौरान पार्षदों ने अपने-अपने क्षेत्रों में सड़क, नाली, सफाई, प्रकाश व्यवस्था और अन्य विकास कार्यों से जुड़ी समस्याएं विस्तार से रखीं।
महापौर ने पार्षदों को भरोसा दिलाया कि सभी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराया जाएगा और विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम का उद्देश्य राजनीति नहीं, बल्कि शहर का विकास है और इसमें सभी पार्षदों का सहयोग आवश्यक है।


