Tuesday, January 13, 2026
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Kanpur : एआईयू अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पाठक के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का टोक्यो विश्वविद्यालय दौरा

भारत–जापान शैक्षणिक और शोध सहयोग को नई गति
– ‘स्टडी इन जापान फ्रॉम साउथ एशिया’ परियोजना पर विस्तार से चर्चा
– भारतीय छात्रों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य
– सकुरा साइंस और लोटस प्रोग्राम से शोध को बढ़ावा
– रणनीतिक साझेदारी को सशक्त करने की दिशा में अहम कदम

Kanpur । एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज़ (AIU) के अध्यक्ष एवं छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU), कानपुर के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय भारतीय शैक्षणिक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में टोक्यो विश्वविद्यालय (UTokyo) का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य भारत और जापान के बीच उच्च शिक्षा, शोध तथा मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में सहयोग को और अधिक मजबूत करना रहा।

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बैठक के दौरान कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने भारत–जापान के दीर्घकालिक शैक्षणिक संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देशों के विश्वविद्यालयों के बीच संस्थागत साझेदारी, संयुक्त शोध और छात्र–शिक्षक आदान–प्रदान से वैश्विक स्तर पर ज्ञान सहयोग को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने भारतीय विश्वविद्यालयों की ओर से सहयोग के ठोस प्रस्ताव भी रखे, जिनका टोक्यो विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने स्वागत किया।

इस अवसर पर UTokyo के अधिकारियों ने “स्टडी इन जापान फ्रॉम साउथ एशिया” परियोजना की विस्तृत जानकारी साझा की। यह जापान के शिक्षा, संस्कृति, खेल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MEXT) द्वारा प्रायोजित एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका संचालन टोक्यो विश्वविद्यालय के इंडिया ऑफिस द्वारा किया जा रहा है। वर्ष 2012 में बेंगलुरु में स्थापित यह कार्यालय 2015 से नई दिल्ली में कार्यरत है और दक्षिण एशिया में शैक्षणिक संपर्क का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।

परियोजना का लक्ष्य आगामी पांच वर्षों में जापान में अध्ययन करने वाले दक्षिण एशियाई छात्रों की संख्या को दोगुना करना है। आंकड़ों के अनुसार, जापान में भारतीय छात्रों की संख्या 2024 में 1,685 से बढ़कर 2028 तक लगभग 3,000 होने का अनुमान है, जबकि कुल दक्षिण एशियाई छात्रों की संख्या 2022 में 20,344 से बढ़कर 2028 तक 40,688 तक पहुंच सकती है।

प्रतिनिधिमंडल को जापान साइंस एंड टेक्नोलॉजी एजेंसी (JST) के तहत संचालित ‘सकुरा साइंस प्रोग्राम’ और भारत–जापान संयुक्त ‘लोटस प्रोग्राम’ की जानकारी भी दी गई। इन कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों को अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक शोध के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर जैसे उभरते क्षेत्र शामिल हैं।

यह दौरा भारत–जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। दोनों पक्षों ने विश्वास जताया कि कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के नेतृत्व में यह सहयोग आने वाले वर्षों में शैक्षणिक और शोध क्षेत्र में उल्लेखनीय परिणाम देगा।

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