प्रेमनाथ यादव, अमित कुमार यादव और नेहा श्रीवास्तव को जूनियर क्लर्क से हटा कर चतुर्थ श्रेणी (चपरासी) बनाया गया।जूनियर क्लर्क के लिए एक मिनट में कम से कम 25 शब्द टाइप करना अनिवार्य है। तीनों कर्मचारी दो बार आयोजित टाइपिंग टेस्ट में यह मानक पूरा नहीं कर सके।
Kanpur । कलेक्ट्रेट प्रशासन ने कार्यकुशलता और जिम्मेदारी में कमी दिखाने वाले तीन कर्मचारियों को जूनियर क्लर्क के पद से हटा कर चतुर्थ श्रेणी यानी चपरासी के पद पर भेज दिया। प्रेमनाथ यादव, अमित कुमार यादव और नेहा श्रीवास्तव दो बार आयोजित टाइपिंग परीक्षा में निर्धारित 25 शब्द प्रति मिनट की गति हासिल करने में असफल रहे। इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी पद पर केवल नौकरी पाना ही काफी नहीं, बल्कि पद के अनुसार दक्षता साबित करना भी अनिवार्य है।
25 शब्द प्रति मिनट का न्यूनतम मानक
जूनियर क्लर्क के लिए नियम है कि कर्मचारियों को एक मिनट में कम से कम 25 शब्द टाइप करने चाहिए। कलेक्ट्रेट में तैनात तीनों कर्मचारियों ने लगातार दो टाइपिंग टेस्ट में यह मानक पूरा नहीं किया। पहली परीक्षा में असफल होने पर उन्हें केवल इंक्रीमेंट रोकने और चेतावनी देने तक सीमित रखा गया। इसके बाद भी एक साल बाद आयोजित दूसरी परीक्षा में तीनों कर्मचारी पास नहीं हो सके।
जिलाधिकारी का सख्त रुख
लगातार असफलता के कारण जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने तीनों कर्मचारियों का डिमोशन करने का आदेश जारी किया। प्रेमनाथ यादव को डीएम कैंप कार्यालय से और अमित कुमार यादव तथा नेहा श्रीवास्तव को कलेक्ट्रेट कार्यालय से हटाया गया। अब ये सभी चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी के रूप में कार्य करेंगे।
मृतक आश्रित कोटे की नियुक्ति
तीनों कर्मचारियों की नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे के तहत हुई थी। नियम के अनुसार, ऐसे कर्मचारियों को एक साल के भीतर टाइपिंग परीक्षा पास करना अनिवार्य होता है। सहानुभूति के आधार पर उन्हें नौकरी दी गई थी, लेकिन पद की गरिमा और न्यूनतम योग्यता पूरी न कर पाने के कारण यह सख्त कार्रवाई करनी पड़ी।
प्रशासन का संदेश
कलेक्ट्रेट प्रशासन का कहना है कि कार्यालयों में फाइलों की नोटिंग और दस्तावेज़ तैयार करने का काम पूरी तरह टाइपिंग पर निर्भर करता है। यदि बुनियादी कार्यकुशलता नहीं होगी, तो सरकारी काम प्रभावित होगा। इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि अब केवल नौकरी पाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पद के अनुसार दक्षता और जिम्मेदारी निभाना जरूरी है।
सुधार का अवसर दिया गया
प्रशासन ने पहले कर्मचारियों को सुधार के पर्याप्त अवसर भी दिए। पहली परीक्षा में असफल होने पर केवल चेतावनी और इंक्रीमेंट रोक दिया गया था। लेकिन लगातार असफलता के बाद अब सख्त कदम उठाना आवश्यक समझा गया। इस घटना ने अन्य कर्मचारियों के लिए भी चेतावनी का संदेश दिया है कि सरकारी पद पर योग्यता और दक्षता दिखाना अनिवार्य है।


