Kanpur । श्री ब्रह्मावर्त सनातन धर्म महामण्डल द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा सनातन धर्म भवन (बी.एन.एस.डी. शिक्षा निकेतन बालिका इण्टर कॉलेज ) मेस्टन रोड में सायं 3 बजे से आचार्य राघव किंकर महाराज जी के श्रीमुख से सम्पन्न हुई ।चित्रकूट से पधारे हुये आचार्य राघव किंकर महाराज जी नेश्रीमद् भागवत कथा के माहात्म्य का वर्णन करते हुये कहा कि राजधर्म, दानधर्म, भगवतधर्म, स्त्रीधर्म, मोक्षधर्म इन धर्मों की चर्चा करते हुये भीष्म पितामह ने धर्मराज युधिष्ठिर को बताया कि राजा को अनेक कष्ट सहते हुये भी राज्य धर्म की रक्षा करनी चाहिये ।
राजा पृथ्वीपति होता हैं, राजा देव स्वरुप होता हैं। दान धर्म की व्याख्या करते हुये कहा कि अपनी आय के दशांश को दान करना चाहिये | वह दान धन के रूप में, विद्या के रूप में, परमार्थ के रूप में अथवा बल के रूप में या हमारे पास जों भी सद्गुण हैं, वह सब सद्गुण दान करें। कभी भी कुएँ से पानी को निकालने से जल कम नहीं होता है अस्तु राजा को समस्त धर्मों का पालन करते हुये प्रजा को प्राणों के समान पोषित करना चाहिये ।
श्रीमद् भागवत कथा में मुख्य यजमान सुरेन्द्र कक्कड़ एवं श्रीमती रचना कक्कड़ ब्रह्मावर्त सनातन धर्म महामण्डल के सभापति वीरेन्द्र पराक्रम आदित्य एवं ब्रह्मावर्त सनातन धर्म महामण्डल के उपसभापति एवं श्रीमद् भागवत कथा के संरक्षक पं. रमाकान्त,मिश्र,कमल किशोर गुप्ता, संयोजक श्री योगेन्द्रनाथ भार्गव,हरिभाऊ खाण्डेकर, डॉ. सरस्वती अग्रवाल, सुश्री रेनू सेठ, सुधा सिंह, प्रधानाचार्या श्रीमती मन्जू शुक्ला, श्रीमती ज्योति मिश्रा, एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे ।


