शून्यकाल से कॉमर्स कमेटी तक पहुंचा मुद्दा, टाइमलाइन तय करने और नोडल अधिकारी नियुक्त करने की मांग
Kanpur । शहर की ऐतिहासिक लाल इमली समेत बंद पड़ी औद्योगिक मिलों की जमीन का इस्तेमाल अब रोजगारपरक परियोजनाओं के लिए करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी ने बंद मिलों के पुनरुद्धार के लिए आईटी हब समेत अन्य परियोजनाओं का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने इसके लिए स्पष्ट समयसीमा तय करने, विशेष कमेटी गठित करने, नोडल अधिकारी नियुक्त करने और कानूनी विवादों के निस्तारण पर जोर दिया है।

सांसद ने कहा कि कभी औद्योगिक पहचान रखने वाले कानपुर की बंद मिलों को बदहाली में नहीं छोड़ा जाना चाहिए। इन परिसरों की जमीन और उपलब्ध संसाधनों का योजनाबद्ध इस्तेमाल कर शहर में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे निवेश आकर्षित करने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर विकसित करने की संभावनाएं भी बन सकती हैं।
लाल इमली के भविष्य पर भी नजर

वर्ष 1876 में शुरू हुई लाल इमली मिल कभी ऊनी कपड़ों के उत्पादन के लिए देशभर में पहचान रखती थी। उत्पादन बंद होने के बाद से इसके भविष्य को लेकर सवाल बने हुए हैं। सांसद रमेश अवस्थी ने मिल का निरीक्षण करने के बाद इसके सहित अन्य बंद औद्योगिक इकाइयों की जमीन के उपयोग पर ठोस योजना बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों को परिसरों की मौजूदा स्थिति का आकलन कर व्यावहारिक प्रस्ताव तैयार करने चाहिए।
संसद में भी उठाया मुद्दा

सांसद के मुताबिक, बंद मिलों को दोबारा उपयोगी बनाने का मुद्दा लोकसभा के शून्यकाल में उठाया गया है। हाल ही में कॉमर्स कमेटी की बैठक में भी उन्होंने देशभर से आए सांसदों और उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव के सामने यह विषय रखा। केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से भी इस संबंध में बातचीत होने की बात उन्होंने कही।
चार बिंदुओं पर कार्ययोजना की मांग
अवस्थी ने बंद मिलों के पुनरुद्धार के लिए चार प्रमुख कदम सुझाए हैं। इनमें पूरी प्रक्रिया की समयसीमा तय करना, विभागों के बीच समन्वय के लिए विशेष कमेटी और नोडल अधिकारी नियुक्त करना, कानूनी विवादों का समाधान करना तथा जमीन और भवनों का विस्तृत ब्योरा जुटाकर ब्रीफ नोट तैयार करना शामिल है। इस रिपोर्ट को संसदीय कॉमर्स कमेटी के सामने रखने की भी पहल की जाएगी।
हालांकि, आईटी हब या अन्य परियोजनाओं पर अंतिम निर्णय से पहले जमीन के स्वामित्व, कानूनी स्थिति, निवेश और तकनीकी व्यवहार्यता का आकलन जरूरी होगा। अब प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाने के लिए संबंधित विभागों की कार्रवाई और ठोस कार्ययोजना का इंतजार है।


