Kanpur।पवन तनय धाम गांधीनगर सीसामऊ में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन भक्ति और ज्ञान का सत्र हुआ। प्रसिद्ध कथावाचक रूद्र कृष्ण जी महाराज ने कथा के माध्यम से भागवत महापुराण की महिमा बताई। उन्होंने अर्पण, समर्पण और तर्पण का तत्व दर्शन करवाया महाराज जी ने बताया कि श्रीमद् भागवत महापुराण भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और तत्वबोध से भरा हुआ है। इस महापुराण के महात्म्य की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें तीन मुख्य संवाद, नारद और भक्ति संवाद, सनत कुमार और नारद संवाद व गोकर्ण और धुंधकारी संवाद के माध्यम से इसकी महिमा का विस्तार किया गया है।
पूज्य महाराज जी ने बताया कि पहले संवाद में अर्पण की कथा, दूसरे में समर्पण की कथा और तीसरे में तर्पण की कथा है। श्रीमद् भागवत महापुराण के अनुसार जो कार्य समाज के लिए किया जाए वह अर्पण है, जो भगवान के लिए किया जाए वह समर्पण है, और जो पितरों के लिए किया जाए वह तर्पण कहलाता है। उन्होंने कहा कि जीवन में सत्य का ध्यान करना ही सबसे महत्वपूर्ण है, और यही सत्य भगवान कृष्ण का स्वरूप है।
कथा के दौरान महाराज जी ने भागवत की मंगलाचरण की चर्चा की, जिसमें भगवान वेदव्यास द्वारा सत्य का ध्यान किया गया है। उन्होंने श्रोताओं को भगवान के 24 अवतारों की कथा से भी परिचित कराया।इस अवसर पर मुख्य यजमान के रूप में परीक्षित विवेक शर्मा (पार्षद),गौरव मिश्रा(शास्त्री),सुरेन्द्र तिवारी आदि उपस्थित रहे।


