वन डिस्ट्रिक्ट वन वेटलैंड’ के तहत जैसरमऊ वेटलैंड का प्रस्ताव शासन को भेजा गया
*ड्रोन मैपिंग से होगा सीमांकन, क्रिटिकल गैप फंड से बनेंगे बर्ड टॉवर*
*लगभग 150 प्रजाति की चिड़ियों एवं तितलियों से समृद्ध है जैसरमऊ वेटलैंड*
*जिलाधिकारी ने किया निरीक्षण विकास के संबन्ध में दिए आवश्यक निर्देश*
Kanpur। बिल्हौर की गंगा कटरी में फैला जैसरमऊ वेटलैंड अब जिले की नई पर्यावरणीय पहचान बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार की ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन वेटलैंड’ योजना के अंतर्गत इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है और संरक्षण के साथ नियंत्रित विकास की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

छह हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में विस्तृत यह आर्द्रभूमि गंगा की बाढ़ के जल से भरती है। वर्ष 2022 में अधिसूचना के बाद यहां आधारभूत सुधार कार्य किए गए। अब इसे व्यवस्थित रूप से विकसित करने के लिए जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह एवं प्रभागीय वन अधिकारी दिव्या ने संयुक्त निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने वेटलैंड क्षेत्र की ड्रोन मैपिंग कराने के निर्देश दिए, जिससे स्पष्ट सीमांकन हो सके और आसपास की भूमि अतिक्रमण से सुरक्षित रखी जा सके। क्रिटिकल गैप फंड से यहां बर्ड टॉवर और वॉच टॉवर विकसित किए जाएंगे। पाथ-वे तैयार कर इसे बर्ड वॉचिंग और नेचर ट्रेल के रूप में विकसित करने की योजना है।
जैसरमऊ वेटलैंड जैव-विविधता की दृष्टि से समृद्ध है। प्रभागीय वन अधिकारी दिव्या ने बताया कि यहां लिटिल कॉर्मोरेंट, भारतीय मोर, ब्रॉन्ज-विंग्ड जैकाना, यूरेशियन मूरहेन, पर्पल हेरॉन, ग्रेट एगरेट और ब्लैक-विंग्ड स्टिल्ट जैसी अनेक पक्षी प्रजातियां दर्ज की गई हैं। नीलगाय और गोल्डन सियार जैसे स्तनधारी भी यहां देखे गए हैं। तितलियों में पीकॉक पैंसी और प्लेन टाइगर विशेष आकर्षण हैं। अब तक लगभग 150 प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने गंगेश्वर आश्रम परिसर में पौधारोपण भी किया। वेटलैंड के निकट स्थित गंगेश्वर आश्रम में महाशिवरात्रि के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिससे धार्मिक और प्रकृति पर्यटन को जोड़ने की संभावनाएं भी उभरती हैं। नियोजित विकास और सुदृढ़ संरक्षण के साथ जैसरमऊ वेटलैंड बिल्हौर की पहचान को नया आयाम देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जिलाधिकारी ने कहा कि जैसरमऊ वेटलैंड पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिक संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से इसे मॉडल वेटलैंड के रूप में विकसित किया जाएगा। स्थानीय युवाओं को पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों से जोड़ा जाएगा तथा इको-टूरिज्म आधारित रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।
*क्या होते है वेटलैंड, संरक्षण क्यों है आवश्यक*
वेटलैंड वह क्षेत्र है जहां जमीन लंबे समय तक जलमग्न रहती है या मिट्टी में नमी बनी रहती है। यह जल वर्षा, नदी की बाढ़ या भूजल से आता है। वेटलैंड प्राकृतिक फिल्टर की तरह कार्य करते हैं। ये जल को शुद्ध करते हैं, भूजल को रिचार्ज करते हैं और बाढ़ के समय अतिरिक्त जल को रोकते हैं। पक्षियों, मछलियों और अन्य जीवों के लिए यह सुरक्षित आवास होते हैं। पर्यावरण संतुलन, जैव-विविधता संरक्षण और स्थानीय स्तर पर सतत रोजगार की दृष्टि से वेटलैंड का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।


