छह महीने से नगर निगम के चक्कर काटने का आरोप, पुलिस चौकी से छूटते ही दोबारा शुरू किया प्रदर्शन
Kanpur । छह महीने तक नगर निगम और विधानसभा अध्यक्ष के आवास के चक्कर काटे, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। आखिरकार नाराज दिव्यांग बुजुर्ग शनिवार को लालबंगला स्थित विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। नगर निगम पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए उन्होंने दो टूक कहा कि समस्याओं के समाधान का ठोस आश्वासन मिलने तक वह नहीं हटेंगे। पुलिस उन्हें समझाने के बाद चौकी ले गई, लेकिन वहां से छूटते ही वह दोबारा आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। सुबह 10 बजे शुरू हुआ प्रदर्शन शाम तक जारी रहा।
पनकी के रतनपुर निवासी भारत दिव्यांग सेवा के संस्थापक एवं अध्यक्ष प्रदीप श्रीवास्तव का आरोप है कि 29 नवंबर को प्रमिला सभागार में ग्लोबल कॉरपोरेशन का वार्षिक अधिवेशन प्रस्तावित है, लेकिन नगर निगम इसकी अनुमति नहीं दे रहा है। वहीं, जीटी रोड स्थित द्वारिकापुरी में विश्व दिव्यांग दिवस का कार्यक्रम होना है। कार्यक्रम स्थल के आसपास कूड़े के ढेर और अतिक्रमण से आवागमन में परेशानी होती है। क्षेत्र में आवारा कुत्तों का भी आतंक है। आरोप है कि कुत्ते आए दिन बच्चों और बुजुर्गों को काट रहे हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद नगर निगम कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।
आश्वासन मिला, लेकिन नहीं हुआ समाधान
प्रदीप श्रीवास्तव के मुताबिक, उन्होंने पहले विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना से समस्याओं की शिकायत की थी। उस समय समाधान का आश्वासन मिला, लेकिन समस्याएं जस की तस बनी रहीं। उनका आरोप है कि अब उनसे मिलने से भी इनकार किया जा रहा है। छह महीने तक चक्कर काटने के बाद उन्हें धरने पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा।
चौकी से छूटे तो फिर बैठ गए
प्रदीप का आरोप है कि उन्हें जबरन उठाकर पुलिस चौकी ले जाया गया। पुलिस के मुताबिक, उन्हें समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन वह नहीं माने। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया तो वह फिर आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। पुलिसकर्मी उन्हें मनाने में जुटे रहे। इसके बाद वह कुर्सी पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे।
समाधान तक जारी रहेगा धरना
प्रदीप ने कहा कि वह सुबह 10 बजे से शांतिपूर्ण तरीके से आवास के गेट पर बैठे हैं, लेकिन उन्हें अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। उधर, विधानसभा अध्यक्ष के पीआरओ शानू मिश्रा ने बताया कि जानकारी मिलने पर वह मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने प्रदीप को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह धरना समाप्त करने को तैयार नहीं हुए।


